
1 किलोवाट (kW) का सोलर पैनल सिस्टम आज के दौर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, खासकर उन घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए जो बढ़ते बिजली बिल से परेशान हैं और Renewable Energy यानी अक्षय ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं। भारत सरकार की ओर से भी सोलर एनर्जी को बढ़ावा दिया जा रहा है, और इसी कड़ी में आम लोग अब अपनी छतों पर सोलर पैनल लगवाने लगे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है — क्या वाकई में 1 किलोवाट सोलर पैनल से पर्याप्त बिजली मिलती है? और क्या यह आपके बिजली बिल को वाकई में कम कर सकता है?
प्रतिदिन कितनी बिजली बनाता है 1 किलोवाट सोलर सिस्टम?
आमतौर पर, 1 किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम प्रतिदिन औसतन 4 से 5 यूनिट (kWh) बिजली उत्पन्न कर सकता है। हालांकि यह आंकड़ा कई कारकों पर निर्भर करता है — जैसे आपके इलाके में सूर्य की रोशनी की उपलब्धता, मौसम की स्थिति, पैनल की गुणवत्ता, और उसे किस दिशा में और किस कोण पर लगाया गया है।
मौसम यदि साफ हो और सूर्य की रोशनी भरपूर मिले तो यह सिस्टम अपने अधिकतम उत्पादन तक पहुंच सकता है। भारत जैसे देश में, जहां साल के अधिकांश दिन धूप वाले होते हैं, वहां सोलर पैनल काफी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
मेरठ जैसे शहरों में क्या रहेगा उत्पादन?
उत्तर प्रदेश के मेरठ जैसे शहर, जहां साल भर भरपूर सौर विकिरण (Solar Radiation) उपलब्ध होता है, वहां एक 1 किलोवाट सोलर पैनल सिस्टम से प्रतिदिन औसतन 4.5 यूनिट बिजली मिलने की संभावना रहती है।
इसका मतलब है कि महीने भर में यह सिस्टम लगभग 135 यूनिट (4.5 यूनिट × 30 दिन) बिजली उत्पन्न कर सकता है, जबकि साल भर में यह आंकड़ा 1,642.5 यूनिट (4.5 यूनिट × 365 दिन) तक पहुंच सकता है।
इतनी बिजली एक छोटे से घर की बेसिक जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है, जैसे पंखे, लाइट, टीवी, और मोबाइल चार्जिंग आदि।
बिजली बिल में कितनी हो सकती है बचत?
मान लीजिए आपके घर की औसत दैनिक खपत 10 यूनिट है, तो 1 किलोवाट सोलर सिस्टम उससे लगभग 45% बिजली की जरूरत को कवर कर लेगा।
इससे आपके बिजली बिल में महीने के हिसाब से बड़ी राहत मिल सकती है। यदि आप डिस्कॉम से मिलने वाली बिजली के लिए औसतन ₹8 प्रति यूनिट का भुगतान कर रहे हैं, तो 1 किलोवाट सिस्टम से हर महीने लगभग ₹1,080 (135 यूनिट × ₹8) की बचत हो सकती है।
वार्षिक रूप से देखें तो यह बचत ₹12,960 तक पहुंच सकती है, जो कुछ ही वर्षों में सोलर सिस्टम की लागत को रिकवर कर सकती है।
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किन बातों का रखें ध्यान?
हालांकि 1 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने से पहले कुछ तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। इसमें सबसे अहम है –
सोलर पैनल की क्वालिटी और टाइप।
आजकल दो प्रमुख प्रकार के पैनल प्रचलन में हैं – मोनोक्रिस्टलाइन (Monocrystalline) और पॉलीक्रिस्टलाइन (Polycrystalline)। मोनोक्रिस्टलाइन पैनल अधिक कुशल माने जाते हैं और कम जगह में ज्यादा बिजली उत्पन्न कर सकते हैं।
स्थापना की दिशा और झुकाव भी बेहद महत्वपूर्ण है।
पैनल को इस तरह से लगाया जाए कि वह दिन के अधिकांश समय सूर्य की सीधी रोशनी में रहे। भारत में सामान्यत: दक्षिण दिशा में झुकाव के साथ पैनल लगाने की सिफारिश की जाती है।
क्या सोलर सिस्टम हर घर के लिए है?
1 किलोवाट का सोलर सिस्टम छोटे से मध्यम आकार के घरों के लिए उपयुक्त होता है। यदि आपकी बिजली खपत अधिक है या आप बिजली से चलने वाले भारी उपकरणों जैसे एसी, गीजर, वॉशिंग मशीन आदि का अधिक उपयोग करते हैं, तो आपको अधिक क्षमता वाला सोलर सिस्टम लगवाने की जरूरत होगी।
फिर भी, शुरुआत के लिए 1 किलोवाट का सिस्टम एक आदर्श विकल्प है जो आपको रिन्यूएबल एनर्जी के रास्ते पर लाने में मदद करता है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है।
क्या सरकार देती है सब्सिडी?
जी हां, भारत सरकार और राज्य सरकारें घरों में सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी भी देती हैं। यह सब्सिडी 20% से 40% तक हो सकती है, जो आपकी कुल लागत को काफी हद तक कम कर सकती है।
साथ ही, PM-KUSUM योजना और अन्य सरकारी स्कीमें भी किसानों और ग्रामीण घरों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।