1kW Solar Unit Generation: 1kW से 10kW तक सोलर पैनल से कितनी बिजली बनेगी? जानिए सटीक कैलकुलेशन का फॉर्मूला

क्या आप भी हर महीने भारी बिजली बिल से परेशान हैं? अब जानिए 1kW से 10kW तक के सोलर पैनल से हर दिन कितनी बिजली बनेगी और सालभर में कितनी बचत होगी। इस लेख में जानिए पूरा गणित, सरकारी सब्सिडी, इंस्टॉलेशन खर्च और फुल रिटर्न—सबकुछ एकदम सटीक और आसान भाषा में

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Written by Rohit Kumar

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1kW Solar Unit Generation: 1kW से 10kW तक सोलर पैनल से कितनी बिजली बनेगी? जानिए सटीक कैलकुलेशन का फॉर्मूला
1kW Solar Unit Generation: 1kW से 10kW तक सोलर पैनल से कितनी बिजली बनेगी? जानिए सटीक कैलकुलेशन का फॉर्मूला

आज के समय में जब बिजली की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और रिन्यूएबल एनर्जी-Renewable Energy की ओर रुझान बढ़ता जा रहा है, ऐसे में सोलर एनर्जी एक अहम विकल्प बनकर उभर रही है। अगर आप भी अपने घर या व्यवसाय के लिए 1kW से लेकर 10kW तक का सोलर सिस्टम लगवाने की सोच रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि एक दिन में यह कितनी यूनिट बिजली (Electricity Unit Generation) पैदा करेगा। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि 1kW Solar Unit Generation कितनी होती है और उसका कैलकुलेशन कैसे किया जाता है।

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1kW सोलर पैनल से प्रतिदिन कितनी यूनिट बिजली बनती है?

1kW सोलर सिस्टम से प्रतिदिन औसतन 4 यूनिट (kWh) बिजली पैदा की जा सकती है। यह आंकड़ा भारत में मिलने वाली औसत धूप के समय (सूर्य की उपलब्धता) पर आधारित है, जो आम तौर पर 4-5 घंटे प्रतिदिन होती है।

ध्यान दें कि यह एक औसत अनुमान है और मौसम, स्थान, पैनल की दिशा, धूल-मिट्टी और शेडिंग आदि के कारण यह उत्पादन कम या ज्यादा हो सकता है।

यूनिट उत्पादन का सटीक फॉर्मूला

सोलर सिस्टम से बनने वाली बिजली का सटीक अनुमान लगाने के लिए नीचे दिया गया फॉर्मूला इस्तेमाल किया जाता है:

Solar Electricity Generation (per day) = Size of Solar Plant (kW) × Average Sunlight Hours (hours/day)

उदाहरण के तौर पर, यदि आपने 1kW का सोलर सिस्टम लगाया है और प्रतिदिन औसतन 4 घंटे सूर्य की रोशनी मिलती है, तो:

1kW × 4 घंटे = 4 यूनिट प्रतिदिन

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1kW से 10kW तक सोलर सिस्टम के उत्पादन की जानकारी

यहाँ 1kW से लेकर 10kW तक के सोलर पैनल सिस्टम द्वारा रोजाना कितनी यूनिट बिजली बनाई जा सकती है, उसका विवरण दिया गया है:

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  • 1kW सिस्टम: 4 यूनिट प्रतिदिन, 120 यूनिट प्रति माह (औसतन)
  • 2kW सिस्टम: 8 यूनिट प्रतिदिन, 240 यूनिट प्रति माह
  • 3kW सिस्टम: 12 यूनिट प्रतिदिन, 360 यूनिट प्रति माह
  • 4kW सिस्टम: 16 यूनिट प्रतिदिन, 480 यूनिट प्रति माह
  • 5kW सिस्टम: 20 यूनिट प्रतिदिन, 600 यूनिट प्रति माह
  • 6kW सिस्टम: 24 यूनिट प्रतिदिन, 720 यूनिट प्रति माह
  • 7kW सिस्टम: 28 यूनिट प्रतिदिन, 840 यूनिट प्रति माह
  • 8kW सिस्टम: 32 यूनिट प्रतिदिन, 960 यूनिट प्रति माह
  • 9kW सिस्टम: 36 यूनिट प्रतिदिन, 1080 यूनिट प्रति माह
  • 10kW सिस्टम: 40 यूनिट प्रतिदिन, 1200 यूनिट प्रति माह

सालाना बिजली उत्पादन

यदि आप सालाना उत्पादन जानना चाहते हैं तो उसे इस तरह से समझ सकते हैं:

1kW सोलर सिस्टम × 4 यूनिट प्रतिदिन × 365 दिन = 1460 यूनिट प्रति वर्ष

इसी तरह, 10kW सोलर सिस्टम सालाना लगभग 14,600 यूनिट बिजली उत्पन्न करेगा।

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बिजली उत्पादन पर प्रभाव डालने वाले मुख्य कारक

सोलर पैनल से बिजली उत्पादन कई बातों पर निर्भर करता है:

  • भौगोलिक स्थान: उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में अधिक सूर्य की उपलब्धता होती है।
  • मौसम: मानसून के मौसम में उत्पादन कम हो सकता है।
  • सिस्टम की क्वालिटी: उच्च गुणवत्ता वाले पैनल और इन्वर्टर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
  • स्थापना की दिशा और झुकाव: सही एंगल और दिशा में लगाना बहुत जरूरी है।
  • रखरखाव: समय-समय पर सफाई और जांच जरूरी है।

लागत और रिटर्न

1kW सोलर सिस्टम की लागत लगभग ₹60,000 से ₹75,000 तक होती है, जो इंस्टॉलेशन, इन्वर्टर, पैनल और वायरिंग को मिलाकर होती है। हालांकि सरकार की ओर से सब्सिडी (Subsidy) भी उपलब्ध है, जिससे यह लागत और कम हो सकती है। इस इन्वेस्टमेंट से आपको 5-6 सालों में पूंजी वसूली हो सकती है और उसके बाद 20 साल तक मुफ्त बिजली का लाभ लिया जा सकता है।

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सरकार की पहल और सब्सिडी

भारत सरकार ने ‘प्रधानमंत्री कुसुम योजना’ और अन्य योजनाओं के तहत घरेलू और कृषि उपयोगकर्ताओं को सब्सिडी देने की व्यवस्था की है। यह Renewable Energy को बढ़ावा देने की एक बड़ी पहल है।

पर्यावरण पर सकारात्मक असर

सोलर एनर्जी न केवल बिजली की लागत घटाती है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को भी कम करती है। यह पर्यावरण के लिए एक हरित और टिकाऊ विकल्प है।

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Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

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