1kW से 20kW Solar System की पूरी कीमत और बचत का हिसाब – जानें ROI, सब्सिडी और ब्रेक-ईवन टाइम

सौर ऊर्जा सिस्टम में निवेश करने से बिजली खर्च घटता है और पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलता है। 1kW से 20kW तक के सिस्टम की लागत ₹70,000 से ₹12 लाख तक हो सकती है। ब्रेक-ईवन समय 8-12 वर्ष और ROI सकारात्मक होता है। सरकारी सब्सिडी से लागत और भी कम हो जाती है। यह एक दीर्घकालिक, लाभकारी और टिकाऊ निवेश है।

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Written by Rohit Kumar

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1kW से 20kW Solar System की पूरी कीमत और बचत का हिसाब – जानें ROI, सब्सिडी और ब्रेक-ईवन टाइम
20kW Solar System

सौर ऊर्जा सिस्टम में निवेश करना आज के समय में न केवल आर्थिक रूप से समझदारी भरा कदम है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सौर पैनल लगाने से पहले इसकी लागत, संभावित बचत, ब्रेक-ईवन समय, निवेश पर रिटर्न (ROI) और सरकारी सब्सिडी की समग्र जानकारी होना आवश्यक है। यह लेख सौर ऊर्जा-Renewable Energy में 1kW से लेकर 20kW तक के सिस्टम की विस्तृत जानकारी देता है, ताकि निवेश से पहले आप पूरी तैयारी कर सकें।

1kW से 20kW तक के सौर सिस्टम की लागत का अनुमान

सौर ऊर्जा सिस्टम की कुल लागत कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे उपकरण की गुणवत्ता, इंस्टॉलेशन खर्च, और स्थान विशेष की आवश्यकताएं। सामान्यतः:

  • 1kW सौर सिस्टम की कीमत ₹70,000 से ₹1,20,000 के बीच होती है, जो छोटे घरों के लिए उपयुक्त होती है। वहीं 5kW सौर सिस्टम की लागत ₹3,50,000 से ₹6,00,000 तक हो सकती है, जो मध्यम आकार के घरों और छोटे व्यवसायों के लिए आदर्श है।
  • 10kW सिस्टम, जो बड़े घरों या व्यावसायिक संस्थानों के लिए उपयुक्त है, इसकी लागत ₹7,00,000 से ₹12,00,000 तक जा सकती है।
  • 20kW सौर ऊर्जा प्रणाली, जो बड़े वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए होती है, इसकी कीमत ₹7,00,000 से ₹10,00,000 के बीच आंकी जाती है।

ये आंकड़े arcrenewables.in के अनुसार हैं और इनमें थोड़े बहुत अंतर राज्य या विक्रेता के अनुसार संभव हैं।

सरकारी सब्सिडी: आपकी लागत को कम करने का अवसर

भारत सरकार Renewable Energy को बढ़ावा देने के लिए सौर पैनलों पर आकर्षक सब्सिडी देती है। हालांकि, यह सब्सिडी केंद्र और राज्य सरकार दोनों के स्तर पर लागू होती है, जिसकी राशि अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकती है। सब्सिडी पाने के लिए राज्य की नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी या स्थानीय डिस्कॉम से संपर्क करना जरूरी है।

ग्रिड-कनेक्टेड सोलर सिस्टम पर आमतौर पर 20% से 40% तक की सब्सिडी मिल सकती है, जिससे आपकी शुरुआती लागत में उल्लेखनीय कटौती संभव होती है।

बचत और ब्रेक-ईवन समय

सौर ऊर्जा प्रणाली से होने वाली बचत इस पर निर्भर करती है कि आपकी बिजली की खपत कितनी है और आप किस राज्य में रहते हैं, क्योंकि बिजली की दरें हर जगह अलग होती हैं।

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उदाहरण के तौर पर, अगर आपने ₹7,00,000 की लागत से सौर पैनल लगाए और हर साल ₹70,000 की बिजली की बचत हो रही है, तो आपकी ब्रेक-ईवन अवधि लगभग 10 साल होगी। इसके बाद की अवधि में आप लगभग मुफ्त बिजली का लाभ ले सकेंगे।

इस तरह, यह एक दीर्घकालिक निवेश बन जाता है जो 25-30 वर्षों तक चलता है।

निवेश पर रिटर्न (ROI)

सौर पैनलों का औसत जीवनकाल 25 से 30 वर्ष होता है। यदि आपका ब्रेक-ईवन समय 10 वर्षों का है, तो शेष 15 से 20 वर्षों तक की अवधि में आप शुद्ध बचत करते हैं। इसका अर्थ है कि इस अवधि में आपकी बिजली खर्च शून्य होगा, जिससे ROI सकारात्मक और आकर्षक बन जाता है।

इस बचत को यदि मुद्रास्फीति और बढ़ती बिजली दरों के संदर्भ में देखा जाए, तो यह लाभ और भी अधिक प्रभावी सिद्ध होता है।

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Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

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