
भारत ने अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही यह साफ हो गया है कि देश में ‘सोलर बूम’ की लहर न केवल पर्यावरण बल्कि आम आदमी की जेब पर भी सकारात्मक असर डालने वाली है, साल 2025 में भारत ने अपनी ग्रिड में रिकॉर्ड 50 GW रिन्यूएबल एनर्जी को जोड़ा है, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इजाफा है।
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निवेश का नया रिकॉर्ड
इस विशाल क्षमता विस्तार के पीछे निवेश की बड़ी भूमिका रही है, आंकड़ों के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग ₹2 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर उतारा गया, इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) ने वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही तक ही ₹331.48 बिलियन के ऋण स्वीकृत कर इस क्षेत्र को बड़ी वित्तीय मजबूती प्रदान की है 2030 तक 500 GW के राष्ट्रीय लक्ष्य को पाने के लिए भारत को कुल ₹30.54 लाख करोड़ के निवेश की दरकार है, जिसकी ओर कदम बढ़ा दिए गए हैं।
राज्यों के बीच मची होड़: राजस्थान और गुजरात शीर्ष पर
रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन में राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है:
- राजस्थान: 29.98 GW की स्थापित क्षमता के साथ देश में नंबर-1 पर बना हुआ है।
- गुजरात: 29.52 GW के साथ दूसरे स्थान पर है और तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- अन्य अग्रणी राज्य: तमिलनाडु (23.70 GW) और कर्नाटक (22.37 GW) भी सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं।
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क्या वाकई बिजली बिल से मिलेगी मुक्ति?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस ‘सोलर बूम’ से आम उपभोक्ताओं का बिजली बिल खत्म हो जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इसके दो मुख्य कारण हैं:
- केंद्र सरकार की इस योजना के तहत 2026-27 तक 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है, इससे पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी, जिससे उनका बिजली बिल प्रभावी रूप से शून्य हो सकता है। अधिक जानकारी और आवेदन के लिए आप आधिकारिक पीएम सूर्य घर पोर्टल पर जा सकते हैं।
- सोलर पावर की टैरिफ दरें ₹2.50 प्रति यूनिट से नीचे आ चुकी हैं, यह कोयला आधारित बिजली की तुलना में बेहद सस्ती है, जिसका लाभ आने वाले समय में डिस्कॉम्स (DISCOMs) के जरिए ग्राहकों तक पहुँच सकता है।
भारत अब अपनी कुल बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर रहा है, 2026 का यह ‘सोलर बूम’ न केवल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो रहा है।







