
त्रिपुरा ने अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 6 मेगावाट (MW) ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर क्षमता का मील का पत्थर पार कर लिया है, राज्य सरकार ने अब अगले कदम के रूप में मार्च 2026 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 10 मेगावाट से अधिक करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
योजना की मुख्य सफलताएं
- पीएम-सूर्य घर योजना का प्रभाव: यह सफलता केंद्र सरकार की ‘पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हुई है।
- उपभोक्ताओं की भागीदारी: वर्तमान में राज्य के 1,762 घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जो अब मिनी पावर स्टेशन के रूप में कार्य कर रहे हैं। कुल 17,131 उपभोक्ताओं ने इस योजना के लिए अपना पंजीकरण कराया है।
- अतिरिक्त आय का साधन: बिजली बिल शून्य करने के साथ-साथ, यह योजना लोगों की कमाई का जरिया भी बनी है। अब तक 187 उपभोक्ताओं ने अपनी अतिरिक्त बिजली बेचकर सामूहिक रूप से ₹53,514 कमाए हैं, जो सीधे उनके बैंक खातों में जमा किए गए हैं।
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भविष्य की रणनीति
त्रिपुरा राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (TSECL) और त्रिपुरा नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (TREDA) मिलकर इस विस्तार पर काम कर रहे हैं, राज्य ऊर्जा मंत्री रतन लाल नाथ के अनुसार, सरकार 2,000 सरकारी इमारतों की छतों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करने की योजना बना रही है, जिससे भविष्य में लगभग 80 मेगावाट अतिरिक्त बिजली पैदा होने की उम्मीद है।
इस पहल के माध्यम से त्रिपुरा न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक आदर्श राज्य बनकर उभर रहा है।






