
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सुशासन दिवस (25 दिसंबर 2025) के अवसर पर गुजरात को वैश्विक क्लीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में तीन बड़ी नीतियों की घोषणा की है, इसमें सबसे प्रमुख ‘इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025’ है, जिसके तहत राज्य ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट (GW) से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
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नई नीति की मुख्य बातें
- एकीकृत ढांचा: यह नीति सौर, पवन और हाइब्रिड परियोजनाओं को एक ही छत के नीचे लाती है, जिससे निवेशकों के लिए प्रक्रिया सरल होगी।
- रुफटॉप विंड (Rooftop Wind): पहली बार उपभोक्ताओं को अपने घरों या छतों पर 50 किलोवाट (kW) तक के सूक्ष्म पवन टरबाइन लगाने की अनुमति दी गई है, इसके लिए वर्चुअल नेट मीटरिंग की सुविधा भी मिलेगी।
- BESS पर जोर: ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) को अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।
- उभरती तकनीकें: इसमें फ्लोटिंग सोलर, कनाल-बेस्ड सोलर और समुद्री ऊर्जा (Tidal/Wave) जैसी नई तकनीकों के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स और फंडिंग का प्रावधान है।
निवेश और रोजगार के अवसर
सरकार का अनुमान है कि इन नीतियों से राज्य में लगभग ₹5 लाख करोड़ का निवेश आएगा और करीब 6 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी, इसके साथ ही, ‘अक्षय ऊर्जा सेतु’ (Akshay Urja Setu) पोर्टल के माध्यम से सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की सुविधा दी जाएगी।
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दो अन्य महत्वपूर्ण नीतियां भी जारी
एकीकृत अक्षय ऊर्जा नीति के साथ-साथ सरकार ने दो और महत्वपूर्ण पहल की हैं:
- ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2025: 2035 तक सालाना 3 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य।
- पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) नीति 2025: ऊर्जा भंडारण के लिए जल-आधारित पंपिंग परियोजनाओं को बढ़ावा देना।
यह नीति 31 दिसंबर 2030 तक प्रभावी रहेगी और स्वीकृत परियोजनाओं को 25 वर्षों तक परिचालन लाभ प्रदान करेगी, इस कदम से गुजरात अब भारत की कुल रिन्यूएबल क्षमता में 16% से अधिक का योगदान देने की तैयारी में है।







