भारत में Solar Module Manufacturing Capacity 2025 में भारी बढ़ी; Demand vs Capacity का सवाल

सरकारी नीतियों और निवेश से रिकॉर्ड उत्पादन क्षमता खड़ी हो चुकी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है क्या घरेलू और निर्यात मांग इस तेज़ रफ्तार को संभाल पाएगी, या उद्योग के सामने नया संकट खड़ा है?

Photo of author

Written by Rohit Kumar

Published on

भारत में Solar Module Manufacturing Capacity 2025 में भारी बढ़ी; Demand vs Capacity का सवाल
भारत में Solar Module Manufacturing Capacity 2025 में भारी बढ़ी; Demand vs Capacity का सवाल

भारत का Solar Manufacturing सेक्टर वर्ष 2025 के अंत तक एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहां तेज़ी से बढ़ी उत्पादन क्षमता अब उद्योग के लिए ही चुनौती बनती जा रही है। Solar Module Manufacturing Capacity के 125 गीगावॉट (GW) के पार पहुंचने की उम्मीद है, जबकि देश की Domestic Demand फिलहाल लगभग 40 GW के आसपास ही सीमित है। यह भारी अंतर आने वाले वित्तीय वर्षों में capacity utilisation, pricing और profitability को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

Domestic Market में Oversupply का खतरा

एनालिस्ट्स के मुताबिक, भारत का Solar Manufacturing Ecosystem अब oversupply regime की ओर बढ़ रहा है। Investment Bank DAM Capital का अनुमान है कि FY28 के अंत तक देश की cumulative solar module manufacturing capacity बढ़कर करीब 192 GW हो सकती है, जबकि मांग की गति इसके मुकाबले धीमी रहेगी। यह स्थिति FY26E से ही कीमतों और मार्जिन पर दबाव बना सकती है।

फिलहाल भारत में Solar Module Manufacturing कुछ बड़े खिलाड़ियों के हाथों में केंद्रित है, जिनमें Waaree Energies, Adani Solar, Premier Energies और Vikram Solar प्रमुख हैं। हालांकि, आने वाले वर्षों में प्रतिस्पर्धा और तेज़ होने की संभावना है।

Policy Support ने बढ़ाया Production, लेकिन चुनौती भी

बीते वर्षों में सरकार की मजबूत नीतिगत सहायता ने इस सेक्टर को तेज़ी से विस्तार करने में मदद की।

  • ALMM (Approved List of Models and Manufacturers)
  • Imported modules और cells पर Basic Customs Duty
  • PLI (Production Linked Incentive) Scheme

इन नीतियों ने imports को सीमित कर domestic manufacturing को बढ़ावा दिया, लेकिन अब जब क्षमता मांग से कहीं अधिक हो चुकी है, तो यही विस्तार profitability test बनता जा रहा है।

DAM Capital के एनालिस्ट Kunal Shah के अनुसार,

“जैसे ही नई capacities operational होंगी, मौजूदा supply tightness, premium pricing और elevated ROIC धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे।”

Solar Cell Manufacturing में भी तेज़ उछाल

केवल modules ही नहीं, बल्कि Solar Cell Manufacturing Capacity में भी बड़ा विस्तार देखने को मिल रहा है।

  • FY25 में ~17 GW
  • FY26E में ~45 GW
  • FY28E तक ~113 GW

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ALCM (Approved List of Cell Manufacturers) जून 2026 से लागू होगी, वैसे-वैसे integrated manufacturers को ही असली फायदा मिलेगा।

US Tariffs से Export पर झटका

भारतीय Solar Manufacturers के लिए एक और बड़ा झटका अमेरिका से आया है।
US द्वारा लगाए गए 50% Tariffs ने भारत के solar module exports को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

Also Readक्या 2kW Solar System घर चलाने के लिए काफी है? चलने वाले उपकरण और Subsidy के बाद Cost जानें

क्या 2kW Solar System घर चलाने के लिए काफी है? चलने वाले उपकरण और Subsidy के बाद Cost जानें

  • 2025 की पहली छमाही में US को exports में 52% की गिरावट
  • Export से लौटकर modules domestic market में आ रहे हैं, जिससे local competition और pricing pressure बढ़ रहा है

Wood Mackenzie ने इसे “Perfect Storm in Indian Solar Supply Chain” करार दिया है और 2025 की तीसरी तिमाही तक 29 GW inventory build-up की चेतावनी दी है।

Margins और Cost Competitiveness पर सवाल

ICRA के अनुसार,

  • Domestic cells का उपयोग करने वाले modules की लागत imported cells की तुलना में 3–4 cents/watt ज्यादा हो सकती है
  • इससे margins पर और दबाव पड़ने की आशंका है

DAM Capital ने निवेशकों की दो मुख्य चिंताएं गिनाई हैं:

  1. Module और Cell Margins आखिर कहां जाकर स्थिर होंगे?
  2. Traditional Module और Cell Segment से आगे growth की visibility कितनी है?

SECI Tenders और Demand का गणित

SECI (Solar Energy Corporation of India) द्वारा दिए गए tender awards भी पूरी तरह राहत नहीं दे पा रहे हैं।

  • FY24: Solar projects के लिए 4.5 GW
  • FY25: Solar awards बढ़कर 5.7 GW
    हालांकि, कुल renewable tenders लगभग स्थिर रहे हैं और भविष्य में Hybrid (Solar + Wind) Projects का हिस्सा बढ़ने की संभावना है।

Consolidation तय, छोटे खिलाड़ी खतरे में

विशेषज्ञों का मानना है कि FY27E के बाद module prices में गिरावट और return ratios में कमजोरी साफ दिखेगी।
DAM Capital के अनुसार,

  • करीब 18 GW की छोटी और marginal module capacities बाजार से बाहर हो सकती हैं
  • Fully backward-integrated manufacturers को ही लंबे समय में फायदा होगा

Waaree और Premier Energies जैसे खिलाड़ी पहले ही ingot-wafer manufacturing में कदम रख चुके हैं, जिससे उन्हें 3–4 साल की बढ़त मिल चुकी है।

Reliance और Adani की Long-Term रणनीति

  • Reliance Industries: Jamnagar Giga Complex में पूरी तरह integrated solar value chain, 2026 तक 20 GW module capacity
  • Adani Solar: Mundra में metallurgical silicon से modules तक complete integration, 2027 तक 10 GW लक्ष्य

Solar Stocks का प्रदर्शन

Renewable Energy Stocks ने महामारी के बाद ज़बरदस्त रैली देखी है।

  • Waaree Energies IPO: 66% premium पर listing, 2025 में अब भी issue price से ऊपर
  • Vikram Solar: IPO के बाद करीब 35% गिरावट

Ware का कहना है कि US में manufacturing presence उसे trade risks से आंशिक सुरक्षा देती है, साथ ही कंपनी Energy Storage में भी निवेश की तैयारी कर रही है।

Also ReadPM Surya Ghar Yojana: गुजरात बना पीएम सूर्य घर योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी, 18,790 MW रूफटॉप सोलर के साथ देश में नंबर-1

PM Surya Ghar Yojana: गुजरात बना पीएम सूर्य घर योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी, 18,790 MW रूफटॉप सोलर के साथ देश में नंबर-1

Author
Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

Leave a Comment

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें