
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र में एक ऐसी तकनीकी सुनामी आने वाली है जो पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि मौजूदा इलेक्ट्रिक कारों के साम्राज्य को भी हिला देगी, वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनियां अब सॉलिड-स्टेट बैटरी (Solid-State Battery) पर दांव लगा रही हैं, जो मात्र 10 मिनट की चार्जिंग में 1000 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करने का दावा करती हैं।
सॉलिड-स्टेट बैटरी: EV जगत का ‘गेम चेंजर’
वर्तमान में ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारें लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग करती हैं, जिनकी अपनी सीमाएं हैं, लेकिन नई सॉलिड-स्टेट तकनीक के आने से परिदृश्य पूरी तरह बदलने वाला है:
- Toyota जैसी कंपनियां ऐसी बैटरी पर काम कर रही हैं जो केवल 10 मिनट में 10% से 80% तक चार्ज हो जाएगी।
- जहां मौजूदा कारें 400-600 KM की रेंज देती हैं, वहीं नई बैटरी तकनीक 1000 KM से 1200 KM तक की दूरी एक बार फुल चार्ज करने पर तय करेगी।
- चीनी दिग्गज CATL ने पहले ही ऐसी बैटरी का अनावरण किया है जो 10 मिनट की चार्जिंग में 600 KM की रेंज जोड़ सकती है। वहीं, Dongfeng 2026 तक 1000 KM रेंज वाली बैटरी के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी में है।
टेस्ला और टाटा के लिए बढ़ी चुनौती
इस नई तकनीक ने स्थापित खिलाड़ियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है:
- Tesla की चिंता: एलन मस्क ने पहले कहा था कि 1000 KM रेंज उनकी प्राथमिकता नहीं है, लेकिन प्रतिस्पर्धियों की इस बढ़त ने टेस्ला को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने को मजबूर कर दिया है।
- Tata Motors का मास्टरप्लान: टाटा ग्रुप गुजरात में 1.6 बिलियन डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये) के निवेश से एक विशाल बैटरी प्लांट (Gigafactory) लगा रहा है। हालांकि, टाटा वर्तमान में लिथियम-आयन तकनीक पर केंद्रित है, लेकिन सॉलिड-स्टेट बैटरी के बढ़ते दबाव के बीच उन्हें अपनी भविष्य की कारों के लिए तकनीक को जल्द अपडेट करना होगा।
कब तक सड़कों पर उतरेंगी ये कारें?
- 2026-2027: चीन की Chery और Dongfeng जैसी कंपनियां 2026 के अंत तक अपनी पहली सॉलिड-स्टेट कारें लॉन्च कर सकती हैं।
- 2027-2028: जापानी दिग्गज Toyota ने 2027-28 तक व्यावसायिक उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
- परीक्षण जारी: Mercedes-Benz अपनी EQS सेडान में इस तकनीक का सफल परीक्षण कर रही है, जिसकी रेंज 1,000 KM से अधिक होने की उम्मीद है।
सॉलिड-स्टेट बैटरी न केवल रेंज बढ़ाएगी बल्कि यह अधिक सुरक्षित (आग लगने का खतरा कम) और टिकाऊ भी होगी विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के बाद EV बाजार में “रेंज की चिंता” (Range Anxiety) हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।







