सोलर पैनल से जुड़ी 4 सबसे बड़ी गलतफहमियां! जानें सच्चाई और बचें नुकसान से!

क्या सोलर पैनल सिर्फ अमीरों के लिए हैं? क्या ये सिर्फ तेज धूप में ही काम करते हैं? 🤔 अगर आप भी इन अफवाहों पर भरोसा करते हैं, तो आपको सच जानना जरूरी है! सोलर पैनल से जुड़ी 4 सबसे बड़ी गलतफहमियों का पर्दाफाश और असली हकीकत – पूरी जानकारी के लिए अभी पढ़ें!

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सोलर पैनल से जुड़ी 4 सबसे बड़ी गलतफहमियां! जानें सच्चाई और बचें नुकसान से!
सोलर पैनल से जुड़ी 4 सबसे बड़ी गलतफहमियां! जानें सच्चाई और बचें नुकसान से!

सोलर पैनल लगवाने के फायदों के बावजूद, कई लोग आज भी कुछ ग़लतफ़हमियों के कारण इससे दूरी बनाते हैं। आइए जानते हैं उन प्रमुख मिथकों के बारे में और उनकी सच्चाई क्या है। सोलर पैनल से जुड़ी 4 अफवाह ऐसी हैं, जिनकी सच्चाई यहाँ जानें।

सोलर पैनल से जुड़ी 4 गलतफहमी

सोलर पैनल के बारे में सही जानकारी का होना आवश्यक है, कई लोग झूठी जानकारियों के कारण इनका प्रयोग करने में घबराते हैं, ऐसे में सही जानकारी का आवश्यक होता है:

1. सोलर पैनल केवल सीधी धूप में ही काम करते हैं?

बहुत से लोग सोचते हैं कि सोलर पैनल केवल तब ही काम करते हैं जब सीधी धूप हो। यह धारणा गलत है। आज के समय में बाजारों में एडवांस सोलर पैनल या गए हैं, जिनके द्वारा बादल या बारिश के दिनों में भी बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। 2021 में विकसित नए पैनल हाफ-कट तकनीक और अन्य एडवांस फीचर्स के साथ आते हैं, जो अलग-अलग मौसम स्थितियों में भी एफिशिएंसी बनाए रखते हैं। अतः यह सोलर पैनल केवल सीधी धूप में ही काम करते हैं यह एक झूठ है।

2. कम धूप में सोलर पैनल की परफॉरमेंस कम हो जाती है?

एक और आम अफवाह यह है कि सोलर पैनल केवल तेज़ धूप में ही अच्छी परफॉरमेंस देते हैं। हकीकत यह है कि मॉडर्न सोलर पैनल कम धूप में भी ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं। तापमान बढ़ने पर इनकी परफॉरमेंस थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन बाइफेशियल पैनल जैसी नई तकनीक वाले पैनल दोनों तरफ से सूर्य की किरणें अब्सॉर्ब कर ज्यादा एनर्जी जनरेट कर सकते हैं। इस तकनीक के सोलर पैनल दोनों ओर से बिजली का निर्माण कर सकते हैं। खराब मौसम में ये पूर्ण क्षमता के अनुसार काम नहीं करते हैं, फिर भी कुछ बिजली का निर्माण करते हैं।

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3. सोलर पैनलों को ऑपरेट करने के लिए बिजली की जरूरत होती है?

बहुत से लोग मानते हैं कि सोलर पैनल सिस्टम तभी काम करता है जब बिजली उपलब्ध हो। यह आधी सच्चाई है। सोलर सिस्टम दो प्रकार के होते हैं – ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड। ऑन-ग्रिड सिस्टम ग्रिड पर निर्भर होते हैं, ऐसे सिस्टम में ग्रिड के साथ सोलर पैनल की बिजली को शेयर किया जाता है, जिसमें ग्रिड की बिजली का प्रयोग उपभोक्ता करता है, जबकि ऑफ-ग्रिड सिस्टम बिजली की अनुपस्थिति में भी काम कर सकते हैं। इनमें बैटरी जोड़ी जाती है, इससे वे दूरदराज के इलाकों में भी उपयोगी होते हैं। सोलर पैनल सूर्य की ऊर्जा के द्वारा काम करते हैं।

4. सोलर पैनल सिर्फ अमीरों के लिए हैं?

यह भी एक बड़ी ग़लतफ़हमी है कि सोलर पैनल केवल अमीरों के लिए होते हैं। हालांकि, सोलर सिस्टम की प्रारंभिक लागत थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में बिजली के बिलों में होने वाली बचत से यह निवेश बहुत फायदेमंद साबित होता है। वर्तमान में सोलर पैनल को लगाने के लिए सरकार गरीब वर्ग के परिवारों को सब्सिडी प्रदान करती है, जिससे सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी और EMI विकल्प इसे और भी किफायती बनाते हैं, जिससे आम लोग भी इसे अपना सकते हैं। सोलर पैनल का प्रयोग कोई भी कर सकता है।

सोलर पैनलों के बारे में इन अफवाहों से बचना जरूरी है। सोलर एनर्जी न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है बल्कि लंबे समय में बिजली बिलों में बचत भी करती है। इसलिए सही जानकारी और समझ के साथ सोलर पैनल को अपनाना एक स्मार्ट फैसला हो सकता है। सोलर पैनल में एक बार निवेश करने के बाद लंबे समय तक इनका लाभ प्राप्त होता है, सोलर पैनल पर्यावरण को बचाने के लिए भी एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि इनके प्रयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है, और जीवाश्म ईंधन की निर्भरता को कम किया जा सकता है।

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