Floating solar farm: पानी पर तैरते सोलर पैनल: जमीन की कमी होगी खत्म, तालाब और नहरों पर बिजली बनाने का ये नया मॉडल मचा रहा है धूम।

भारत में बढ़ती जनसंख्या और घटती जमीन के बीच बिजली उत्पादन का एक नया और अनोखा तरीका 'फ्लोटिंग सोलर फार्म' सुर्खियां बटोर रहा है, अब देश के बड़े जलाशयों, बांधों और नहरों की सतह पर सोलर पैनल बिछाकर न केवल बिजली बनाई जा रही है, बल्कि इससे जमीन की किल्लत की समस्या भी जड़ से खत्म होती दिख रही है

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Written by Rohit Kumar

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Floating solar farm: पानी पर तैरते सोलर पैनल: जमीन की कमी होगी खत्म, तालाब और नहरों पर बिजली बनाने का ये नया मॉडल मचा रहा है धूम।
Floating solar farm: पानी पर तैरते सोलर पैनल: जमीन की कमी होगी खत्म, तालाब और नहरों पर बिजली बनाने का ये नया मॉडल मचा रहा है धूम।

भारत में बढ़ती जनसंख्या और घटती जमीन के बीच बिजली उत्पादन का एक नया और अनोखा तरीका ‘फ्लोटिंग सोलर फार्म’ सुर्खियां बटोर रहा है, अब देश के बड़े जलाशयों, बांधों और नहरों की सतह पर सोलर पैनल बिछाकर न केवल बिजली बनाई जा रही है, बल्कि इससे जमीन की किल्लत की समस्या भी जड़ से खत्म होती दिख रही है।

क्यों खास है यह वाटर-बेस्ड मॉडल?

विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लोटिंग सोलर पैनल जमीन पर लगे पारंपरिक पैनलों की तुलना में कहीं अधिक कारगर हैं, इसके मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं: 

  •  पानी की प्राकृतिक ठंडक (Cooling Effect) के कारण ये पैनल ज्यादा गर्म नहीं होते, जिससे इनकी क्षमता 5% से 15% तक बढ़ जाती है।
  • पानी की सतह ढकी होने से वाष्पीकरण (Evaporation) कम होता है। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर बांध जैसे प्रोजेक्ट्स करोड़ों लीटर पानी को भाप बनने से बचाने में सक्षम हैं।
  • खेती या उद्योगों के लिए इस्तेमाल होने वाली कीमती जमीन को बिना छुए, बेकार पड़े जलाशयों का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। 

भारत के ‘पावर हाउस’ बन रहे ये प्रोजेक्ट्स

देश के कई राज्यों में इस मॉडल ने धूम मचा दी है, NTPC के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के रामागुंडम में भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट (100 MW) पूरी तरह चालू है, वहीं, मध्य प्रदेश का ओंकारेश्वर प्रोजेक्ट 600 MW की क्षमता के साथ दुनिया के सबसे विशाल सोलर पार्कों में शामिल होने की तैयारी में है। 

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भविष्य की राह

हालांकि, पानी में सेटअप लगाने की लागत जमीन के मुकाबले थोड़ी अधिक है, लेकिन पानी की बचत और अधिक बिजली उत्पादन इस अतिरिक्त खर्च की भरपाई कर देते हैं, गुजरात जैसे राज्यों में नहरों के ऊपर (Canal Top) सोलर पैनल लगाकर सिंचाई और बिजली दोनों का लाभ लिया जा रहा है।

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Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

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