
दौसा जिले के किसानों को अब बिजली कटौती की समस्या से मुक्ति मिल गई है। टोरड़ा गांव में लगाए गए सोलर प्लांट से किसानों को न केवल सिंचाई की सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। यह परियोजना कृषि क्षेत्र में एक नई उम्मीद लेकर आई है, जिससे किसानों की मेहनत आसान हो जाएगी और क्षेत्र में विकास की नई राह खुलेगी।
सोलर प्लांट का निर्माण और बिजली उत्पादन
दौसा जिले के टोरड़ा गांव में सोलर प्लांट का निर्माण तेजी से चल रहा है। यह प्लांट करीब 10 बीघा जमीन पर तैयार हो रहा है, और इसका उद्देश है प्रतिदिन 7,000 यूनिट बिजली का उत्पादन करना। इस उत्पादन से टोरड़ा, फर्राशपुरा, डेरा और राणोली में स्थित ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) को बिजली आपूर्ति की जाएगी। यह पहल किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराएगी, जिससे वे आसानी से सिंचाई कर सकेंगे। अब उन्हें रात को खेतों में पानी देने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
लागत और परियोजना का उद्देश्य
बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता तेज सिंह के अनुसार, इस सोलर प्लांट को बनाने में लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस परियोजना को राइजिंग राजस्थान योजना के तहत शोलेस इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है। इस सोलर प्लांट के जरिए बिजली कटौती की समस्या को सुलझाने में मदद मिलेगी। इस सोलर प्लांट में कुल 100 टेबलों पर करीब 3,000 सोलर प्लेट्स लगाई गई हैं, जो अब किसानों के लिए वरदान साबित होंगी।
स्थानीय रोजगार के अवसर
इस सोलर प्लांट के निर्माण से टोरड़ा गांव और आसपास के क्षेत्रों में अस्थायी रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं। इस परियोजना में अब तक सैकड़ों स्थानीय लोगों को काम मिला है। साथ ही, 10 लोगों को 25 वर्षों के लिए स्थायी रोजगार भी दिया गया है। इससे क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी और स्थानीय लोगों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
क्षेत्रीय विकास और ऊर्जा संरक्षण
इस सोलर प्लांट के अलावा, दौसा जिले में ऊर्जा संरक्षण के प्रयास भी सफल हो रहे हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे के दौसा स्टेशन को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा ‘शून्य प्लस अवार्ड’ से नवाजा गया है। यह सम्मान राजस्थान और उत्तर पश्चिम रेलवे में पहली बार किसी स्टेशन को मिला है। इस सोलर प्लांट के चलते अगर बिजली की आपूर्ति सही ढंग से चलती रही तो यह क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बिजली की स्थिति को बेहतर बना सकेगा। इससे किसानों के लिए सिंचाई आसान हो जाएगी और बिजली विभाग को भी लंबे समय में लाभ होगा।
सकारात्मक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ
सोलर ऊर्जा का यह कदम न केवल किसानों की समस्याओं को हल करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के ऊर्जा संरक्षण में भी एक महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस परियोजना का प्रभाव भविष्य में और भी सकारात्मक रूप से दिखाई देगा, क्योंकि इससे इलाके में बुनियादी ढांचे की स्थिति बेहतर होगी और ग्रामीणों की जीवनशैली में सुधार होगा।