Perovskite Solar Cells: सिलिकॉन का दौर खत्म? वैज्ञानिकों ने बनाया 30% ज्यादा पावर देने वाला सस्ता और लचीला सोलर सेल

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए, वैज्ञानिकों ने एक नई पीढ़ी के सोलर सेल विकसित किए हैं, जो पारंपरिक सिलिकॉन-आधारित पैनलों की तुलना में 30% से अधिक बिजली उत्पन्न करने में सक्षम हैं, इन 'पेरोव्स्काइट-सिलिकॉन टैन्डम' (perovskite-silicon tandem) सोलर सेल ने अपनी उच्च दक्षता, कम उत्पादन लागत और लचीलेपन की क्षमता के कारण उद्योग में खलबली मचा दी है

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Written by Rohit Kumar

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Perovskite Solar Cells: सिलिकॉन का दौर खत्म? वैज्ञानिकों ने बनाया 30% ज्यादा पावर देने वाला सस्ता और लचीला सोलर सेल
Perovskite Solar Cells: सिलिकॉन का दौर खत्म? वैज्ञानिकों ने बनाया 30% ज्यादा पावर देने वाला सस्ता और लचीला सोलर सेल

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए, वैज्ञानिकों ने एक नई पीढ़ी के सोलर सेल विकसित किए हैं, जो पारंपरिक सिलिकॉन-आधारित पैनलों की तुलना में 30% से अधिक बिजली उत्पन्न करने में सक्षम हैं, इन ‘पेरोव्स्काइट-सिलिकॉन टैन्डम’ (perovskite-silicon tandem) सोलर सेल ने अपनी उच्च दक्षता, कम उत्पादन लागत और लचीलेपन की क्षमता के कारण उद्योग में खलबली मचा दी है, इस नवाचार ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या यह नई तकनीक अंततः सौर पैनल बाजार में सिलिकॉन के दशकों पुराने प्रभुत्व को समाप्त कर देगी। 

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रिकॉर्ड-तोड़ दक्षता

इस नई तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी असाधारण ऊर्जा रूपांतरण दक्षता (energy conversion efficiency) है, हाल ही में, नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी लेबोरेटरी (NREL) द्वारा प्रमाणित इन टैन्डम सेल ने प्रयोगशाला परीक्षणों में 34.85% तक की दक्षता हासिल की है, यह आंकड़ा वर्तमान में उपलब्ध सबसे उन्नत पारंपरिक सिलिकॉन पैनलों की औसत दक्षता (लगभग 20-25%) से कहीं अधिक है।

सस्ता और सरल विनिर्माण

सिलिकॉन पैनलों के उत्पादन के लिए उच्च तापमान और जटिल विनिर्माण प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है, इसके विपरीत, पेरोव्स्काइट सामग्री को कम तापमान पर ‘इंकजेट प्रिंटिंग’ या ‘स्प्रे कोटिंग’ जैसी सरल और सस्ती विधियों का उपयोग करके जमा किया जा सकता है, यह लागत में भारी कटौती का मार्ग प्रशस्त करता है।

लचीलापन और बहुमुखी अनुप्रयोग

पारंपरिक सिलिकॉन पैनल कठोर होते हैं, जबकि पेरोव्स्काइट सामग्री को लचीले प्लास्टिक सबस्ट्रेट्स (सतहों) पर मुद्रित किया जा सकता है, यह लचीलापन इन्हें खिड़कियों, वाहनों की छतों, पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य गैर-समतल सतहों पर उपयोग के लिए आदर्श बनाता है।

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टैन्डम लाभ (दोहरी परत)

इन सेलों की सफलता का रहस्य इनका ‘टैंडम’ या दोहरी परत वाला डिज़ाइन है, ऊपरी पेरोव्स्काइट परत दृश्य प्रकाश (visible light) को अवशोषित करती है, जबकि नीचे की सिलिकॉन परत अवरक्त प्रकाश (infrared light) को अवशोषित करती है। यह संयोजन सूर्य के प्रकाश के व्यापक स्पेक्ट्रम का उपयोग करता है, जिससे कुल बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

चुनौतियाँ और भविष्य की राह

हालांकि उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं, लेकिन इस तकनीक के व्यापक व्यावसायीकरण में कुछ बाधाएँ अभी भी हैं:

  •  पेरोव्स्काइट सामग्री नमी, गर्मी और यूवी प्रकाश के प्रति संवेदनशील होती है और सिलिकॉन की तुलना में तेजी से खराब हो सकती है। वैज्ञानिक इस समस्या को दूर करने के लिए सुरक्षात्मक परतों और नई संरचनाओं पर काम कर रहे हैं।
  • बड़े पैमाने पर, वाणिज्यिक स्तर पर इन सेलों का उत्पादन और बाजार में उपलब्धता अभी भी शुरुआती चरणों में है। कुछ कंपनियाँ, जैसे कि Oxford PV, उत्पादन के करीब हैं, लेकिन व्यापक बाजार में पहुंचने में समय लगेगा। 

विशेषज्ञों का मानना है कि पेरोव्स्काइट तकनीक सिलिकॉन का पूरी तरह से स्थान नहीं लेगी, बल्कि एक पूरक तकनीक के रूप में काम करेगी, जो सौर ऊर्जा की दक्षता और अनुप्रयोगों के दायरे का विस्तार करेगी, यह नवाचार निश्चित रुप से सौर ऊर्जा क्रांति में एक “गेम-चेंजर” साबित हो सकता है।

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Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

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