Perovskite Solar Cells का कमाल: 34% एफिशिएंसी रिकॉर्ड, भारत में कब आएंगे कमर्शियल पैनल? ​​

सौर ऊर्जा (Solar Energy) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने 'पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स' (Perovskite Solar Cells) की मदद से ऊर्जा उत्पादन के पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं, इस नई तकनीक ने न केवल सौर पैनलों की कार्यक्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, बल्कि भारत सहित दुनिया भर में सस्ती बिजली के नए द्वार खोल दिए हैं

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Written by Rohit Kumar

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Perovskite Solar Cells का कमाल: 34% एफिशिएंसी रिकॉर्ड, भारत में कब आएंगे कमर्शियल पैनल? ​​
Perovskite Solar Cells का कमाल: 34% एफिशिएंसी रिकॉर्ड, भारत में कब आएंगे कमर्शियल पैनल? ​​

सौर ऊर्जा (Solar Energy) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने ‘पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स’ (Perovskite Solar Cells) की मदद से ऊर्जा उत्पादन के पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं, इस नई तकनीक ने न केवल सौर पैनलों की कार्यक्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, बल्कि भारत सहित दुनिया भर में सस्ती बिजली के नए द्वार खोल दिए हैं।

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34.85% दक्षता के साथ बना विश्व रिकॉर्ड

सौर ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी LONGi ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए ‘सिलिकॉन-पेरोव्स्काइट टैंडम सौर सेल’ में 34.85% की दक्षता (Efficiency) हासिल की है, इस रिकॉर्ड को अमेरिका की प्रतिष्ठित नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी लेबोरेटरी (NREL) द्वारा आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया गया है।

यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक सिलिकॉन पैनलों की अधिकतम क्षमता की एक सीमा होती है, टैंडम सेल तकनीक में, पेरोव्स्काइट की परत सूर्य की नीली रोशनी को सोखती है, जबकि निचली सिलिकॉन परत लाल रोशनी को बिजली में बदलती है, इस दोहरी प्रक्रिया के कारण ऊर्जा उत्पादन में जबरदस्त उछाल आया है।

भारत में कमर्शियल दस्तक: कब लगेंगे आपकी छतों पर पैनल?

भारतीय बाजार में पेरोव्स्काइट तकनीक का इंतजार अब खत्म होने वाला है, 2026 की शुरुआत के साथ ही भारत इस दिशा में बड़े कदम उठा रहा है:

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  • रिलायंस इंडस्ट्रीज की बड़ी तैयारी: मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने न्यू एनर्जी बिजनेस के माध्यम से पेरोव्स्काइट तकनीक पर तेजी से काम कर रही है, उम्मीद है कि 2026 के अंत तक कंपनी कमर्शियल स्तर पर इन पैनलों का उत्पादन शुरू कर देगी।
  • मेगावाट स्केल प्रोडक्शन: भारतीय स्टार्टअप P3C पेरोव्स्काइट टेक्नोलॉजी ने घोषणा की है कि वे 2026 के भीतर मेगावाट-स्केल का विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) स्थापित कर लेंगे, जिससे आम उपभोक्ताओं को ये पैनल मिलने शुरु हो जाएंगे।
  • सरकारी प्रोत्साहन: भारत सरकार ने जून 2026 से सरकारी परियोजनाओं के लिए स्वदेशी पैनलों को अनिवार्य कर दिया है। इससे घरेलू स्तर पर पेरोव्स्काइट सेल्स के निर्माण को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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क्या होगी खासियत और चुनौतियां?

विशेषज्ञों के अनुसार, पेरोव्स्काइट पैनल पारंपरिक पैनलों की तुलना में पतले, लचीले और अधिक शक्तिशाली होते हैं हालांकि, इनकी लंबी उम्र (Durability) और नमी से बचाव अभी भी एक चुनौती है, जिस पर शोध जारी है।

बाजार का अनुमान

जानकारों का मानना है कि आम ग्राहकों के लिए ये हाई-एफिशिएंसी पैनल 2026 के अंतिम महीनों या 2027 की शुरुआत तक बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे, यह तकनीक न केवल बिजली के बिल में कटौती करेगी, बल्कि कम जगह में अधिक बिजली पैदा करने की सुविधा भी देगी।

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Author
Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

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