
अब वाई-फाई की तरह सोलर पैनल का इस्तेमाल कर भी डाटा भेजा जा सकेगा। यह तकनीक ऐसे इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकती है, जहां बिजली की कमी हो या इंटरनेट कनेक्टिविटी की स्थिति खराब हो। इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग द्वारा विकसित की गई इस तकनीक को लाईफाई (LiFi) कहा जाता है, जो डाटा ट्रांसफर के लिए सूर्य की रोशनी का उपयोग करता है।
यह तकनीक फिलहाल 10 मीटर तक डाटा ट्रांसफर करने में सक्षम है और इसमें एलईडी बल्बों का उपयोग किया जाता है। डाटा ट्रांसफर की गति भी बढ़ाई गई है और अब इसकी स्पीड 18.8 एमबीपीएस तक पहुंच गई है। इस शोध में मुख्य योगदान प्रो. विवेक ए. बोहरा और उनके अनुसंधान दल का है, जिनमें दो छात्र संजय सिंह और रवि सैनी भी शामिल हैं। इस तकनीक का पेटेंट जल्द ही मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
तकनीक का विकास और इसके लाभ
यह तकनीक सोलर पैनल के माध्यम से डाटा ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को सरल बनाती है। जहां पर भी डाटा भेजा जाता है, वहां एलईडी बल्बों और सामान्य बल्बों का इस्तेमाल करके डाटा प्राप्त किया जा सकता है। यह तरीका विशेष रूप से सैन्य और दूरदराज क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित होती है।
सोलर पैनल के इस्तेमाल से डाटा ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को लेकर काफी समय से शोध किया जा रहा था, और अब इसे एक व्यावसायिक रूप में पेश किया जा सकता है। प्रो. विवेक बोहरा के अनुसार, यह तकनीक भारतीय ग्राम पंचायतों और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को हल करने में मददगार साबित हो सकती है।
लाईफाई (LiFi) तकनीक का कार्यप्रणाली
इस तकनीक में, सोलर पैनल के पीछे एक एनालॉग सर्किट लगाया गया है जो डाटा ट्रांसमिशन का कार्य करता है। जब डाटा भेजने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो सर्किट एलईडी बल्ब के माध्यम से डाटा भेजता है और प्राप्त करने के लिए सर्किट को उसी प्रकार के बल्ब के साथ जोड़ा जाता है। इसका लाभ यह है कि जहां पर सोलर पैनल की रोशनी होती है, वहां पर आसानी से डाटा ट्रांसफर किया जा सकता है।
सोलर पैनल के माध्यम से डाटा ट्रांसफर की गति को बढ़ाने के लिए खास बैंडविड्थ इनहैंसमेंट सर्किट (BES) का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक के विकसित होने से पहले, इसकी स्पीड महज 1.5 एमबीपीएस थी, जो अब 18.8 एमबीपीएस तक बढ़ गई है। इसके अलावा, यदि सामान्य सोलर पैनल के बजाय ऑर्गेनिक और पेरोवस्काइट सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जाए, तो डाटा ट्रांसफर की गति और भी बेहतर हो सकती है।
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सोलर पैनल की मदद से इंटरनेट कनेक्टिविटी
यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक उम्मीद की किरण साबित हो सकती है। भारत सरकार ने ग्राम पंचायतों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है, जैसे कि भारत नेट (BharatNet)। इन योजनाओं के तहत, गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सोलर पैनल की मदद से इस तकनीक का प्रयोग करके सिर्फ ग्राम पंचायतों तक ही नहीं, बल्कि हर घर में इंटरनेट की सुविधा पहुंचाई जा सकती है। इसके लिए लोगों को केवल अपनी छतों पर सोलर पैनल स्थापित करने की आवश्यकता होगी।
इस तकनीक का सैन्य क्षेत्र में भी बड़ा महत्व हो सकता है। कई ऐसे इलाकों में जहां बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, वहां पर सूर्य की रोशनी का उपयोग करके महत्वपूर्ण आंकड़ों का आदान-प्रदान किया जा सकता है।
भविष्य की दिशा
फिलहाल, इस तकनीक का इस्तेमाल 10 मीटर के दायरे में किया जा सकता है, लेकिन इसके रेंज को बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। भविष्य में, यह तकनीक और भी व्यापक हो सकती है, जिससे दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार होगा और डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
यह शोध और तकनीक अब तक के सबसे प्रभावी अनुसंधानों में से एक मानी जा रही है, और इसके पेटेंट की मंजूरी मिलने के बाद यह पूरी दुनिया में अपनी जगह बना सकता है।