
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी विकास ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, अगर आप भी बार-बार बैटरी खराब होने या सोलर पैनल की कम दक्षता (Efficiency) से परेशान हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है, वैज्ञानिकों ने ऐसे नए सोलर सेल्स विकसित कर लिए हैं जो न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाएंगे, बल्कि 30 सालों तक बिना किसी खराबी के काम करेंगे।
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पेरोव्स्काइट और टेंडेम सेल्स का जादू
अभी तक बाज़ार में मिलने वाले ज्यादातर सोलर पैनल ‘सिलिकॉन’ आधारित होते हैं, लेकिन अब ‘पेरोव्स्काइट’ (Perovskite) और ‘टेंडेम’ (Tandem) तकनीक वाले सेल्स ने दस्तक दे दी है, शोधकर्ताओं के अनुसार, ये सेल्स सूर्य की रोशनी को बिजली में बदलने के मामले में सिलिकॉन से कहीं आगे हैं, रिपोर्ट बताती है कि इनकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता इतनी अधिक है कि ये कम धूप वाले दिनों में भी बैटरी को फुल चार्ज रखने में सक्षम हैं।
30 साल की लंबी उम्र और ‘जीरो’ मेंटेनेंस
इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है, नए नैनो-कोटिंग मटेरियल के इस्तेमाल से इन सेल्स को नमी, गर्मी और भारी बारिश से सुरक्षित बनाया गया है, विशेषज्ञों का दावा है कि एक बार इंस्टॉल होने के बाद ये पैनल 30 साल तक अपनी पूरी क्षमता से काम करते रहेंगे। इससे उपभोक्ताओं का बैटरी बदलने और बार-बार मरम्मत कराने का भारी-भरकम खर्च लगभग खत्म हो जाएगा।
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा कम असर
तकनीकी रूप से उन्नत होने के बावजूद, पेरोव्स्काइट सेल्स का उत्पादन सिलिकॉन की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में सोलर पैनल की कीमतें कम होंगी और यह आम जनता की पहुंच में होगा। Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) भी देश में ऐसी नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है ताकि ‘नेट जीरो’ लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
सोलर सेक्टर में आ रहे इस बदलाव से न केवल बिजली बिल जीरो होगा, बल्कि बैटरी रिप्लेसमेंट के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी, आने वाला समय पूरी तरह से इन ‘सुपर सेल्स’ का होने वाला है।







