
बिहार के किसान अब अपनी जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर या उसे लीज पर देकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) ने 1121 विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े 3681 कृषि और मिश्रित फीडरों के सोलराइजेशन के लिए निविदा जारी की है। इस योजना के तहत राज्य के किसानों को हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में भागीदार बनने का मौका मिलेगा। इससे उनकी आमदनी में इजाफा होगा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
बिहार सरकार के ऊर्जा विभाग के सचिव एवं BSPHCL के सीएमडी पंकज कुमार पाल ने बताया कि इस योजना के तहत किसान अपनी भूमि पर सोलर प्लांट लगाकर या अपनी जमीन को लीज/रेंट पर देकर आय का एक नया स्रोत बना सकते हैं। एक मेगावाट सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए लगभग चार एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।
किसान या कंपनियों को विद्युत उपकेंद्र के पांच किमी के दायरे में भूमि का स्वामित्व या पट्टा प्राप्त करना होगा। इसके बाद उन्हें संयंत्र का निर्माण कर इसे 11 केवी ट्रांसमिशन लाइन द्वारा निकटतम विद्युत उपकेंद्र से जोड़ना होगा।
निविदा की शर्तें और सरकारी वित्तीय सहायता
इस निविदा में कोई भी कंपनी अकेले या अधिकतम तीन सदस्यों के समूह में भाग ले सकती है। समूह बिना किसी तकनीकी या वित्तीय शर्तों के भी आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रति मेगावाट सोलर प्लांट की अनुमानित लागत 5 से 6 करोड़ रुपये है। इसमें भारत सरकार द्वारा 1.05 करोड़ रुपये और बिहार सरकार द्वारा 45 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
सफल आवेदकों को 12 महीने के भीतर सोलर प्लांट स्थापित कर उसे विद्युत उपकेंद्र से जोड़ना अनिवार्य होगा। योजना के तहत वितरण कंपनी 25 वर्षों तक सौर ऊर्जा खरीदेगी, जिससे किसानों को लंबे समय तक स्थायी आय प्राप्त होगी।
बिहार में Renewable Energy को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम
बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के व्हाट्सएप नंबर 7320924004 पर इस योजना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना बिहार में Renewable Energy को बढ़ावा देने के साथ ही राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
ऊर्जा सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि इस योजना से बिहार के किसानों को सशक्त बनाया जाएगा और हरित ऊर्जा उत्पादन में राज्य की भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की परियोजनाएं राज्य में उद्यमशीलता और आर्थिक स्थिरता को भी प्रोत्साहित करेंगी।
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कजरा सोलर पावर प्लांट: बिहार की सबसे बड़ी हरित ऊर्जा परियोजना
इसके अलावा, बिहार सरकार कजरा सोलर पावर प्लांट परियोजना पर भी तेजी से कार्य कर रही है। यह परियोजना 185 मेगावाट उत्पादन क्षमता और 254 मेगावाट आवर बैट्री भंडारण क्षमता वाली होगी। इस परियोजना को इंजीनियरिंग कंपनी एलएंडटी (L&T) द्वारा विकसित किया जा रहा है।
ऊर्जा विभाग ने निर्देश दिया है कि इस परियोजना का निर्माण निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाए। यह परियोजना बिहार में Renewable Energy के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायता करेगी।
बिहार के किसानों के लिए सोलर प्लांट योजना क्यों फायदेमंद?
- अतिरिक्त आय का स्रोत: किसान अपनी खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर या उसे लीज पर देकर स्थायी आय अर्जित कर सकते हैं।
- सरकारी सहायता: केंद्र और राज्य सरकार से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
- पर्यावरण संरक्षण: यह योजना हरित ऊर्जा के माध्यम से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होगी।
- लंबे समय तक लाभ: वितरण कंपनी 25 वर्षों तक सौर ऊर्जा खरीदेगी, जिससे किसानों को निश्चित आय प्राप्त होगी।