
देश में बढ़ती बिजली की दरों और लगातार हो रही कटौती के बीच अब लोग सोलर एनर्जी-Solar Energy की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में, जहां बिजली की सप्लाई अस्थिर रहती है, वहां लोग केवल फैन और लाइट के लिए सोलर पावर सिस्टम लगवाने का विकल्प खोज रहे हैं। अगर आप भी सोच रहे हैं कि केवल लाइट और फैन चलाने के लिए सोलर पैनल लगवाएं, तो आपको यह जानना जरूरी है कि इसके लिए कितनी क्षमता का सोलर पैनल चाहिए और इसकी कुल लागत कितनी आएगी। यह आर्टिकल इसी विषय पर केंद्रित है।
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अगर आपकी जरूरत केवल फैन और लाइट के लिए सोलर सिस्टम की है, तो 500W से लेकर 1kW तक का सिस्टम आपके लिए पर्याप्त है। इसमें शुरुआती लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह खर्च को बचत में बदल देता है। इसके अलावा यह एक पर्यावरण हितैषी कदम भी है।
सिर्फ लाइट और फैन के लिए कितने किलोवाट का सोलर पैनल चाहिए?
अगर आपकी जरूरत सिर्फ बेसिक उपयोग तक सीमित है जैसे 2-3 एलईडी बल्ब (LED Bulb), 1-2 पंखे (Ceiling Fan or Table Fan) और मोबाइल चार्जर, तो इसके लिए आपको एक ज्यादा बड़ी सोलर सेटअप की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- एक 100 वाट (Watt) का फैन प्रतिदिन लगभग 4-5 घंटे चलता है।
- एक 9-12 वॉट की एलईडी लाइट प्रतिदिन औसतन 5-6 घंटे तक जलती है।
ऐसे में कुल मिलाकर अगर आप 2 फैन और 3-4 लाइट जलाना चाहते हैं, तो लगभग 300-400 वाट की आवश्यकता होगी। इसे ध्यान में रखते हुए:
- 500W से 1kW तक का सोलर पैनल पर्याप्त रहेगा।
अगर आप थोड़ी अधिक सुविधा चाहते हैं, जैसे रातभर पंखा चलाना और थोड़ी और लाइटिंग, तो 1 किलोवाट (kW) का सोलर पैनल सिस्टम उपयुक्त रहेगा।
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कितनी होगी कुल लागत?
सोलर पैनल की कीमत उसकी क्वालिटी, ब्रांड और सिस्टम के प्रकार (ऑन-ग्रिड, ऑफ-ग्रिड, हाइब्रिड) पर निर्भर करती है। केवल लाइट और फैन के लिए अधिकतर लोग ऑफ-ग्रिड सिस्टम चुनते हैं ताकि बिजली जाने पर भी सोलर बैटरी से पंखा और लाइट चल सके।
- 500W ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम की लागत: ₹35,000 से ₹45,000 तक।
- 1kW ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम की लागत: ₹60,000 से ₹75,000 तक।
इस कीमत में सोलर पैनल, इन्वर्टर, बैटरी, वायरिंग और इंस्टॉलेशन शामिल होते हैं। अगर आप ब्रांडेड और MNRE अप्रूव्ड सिस्टम लगवाते हैं, तो सरकार से सब्सिडी भी मिल सकती है, जो कुल लागत को 20-40% तक घटा सकती है।
सोलर सिस्टम लगाने के फायदे
रिन्यूएबल एनर्जी-Renewable Energy के स्रोतों की ओर बढ़ने का एक बड़ा फायदा है कि आप लंबे समय तक बिजली बिल से मुक्त हो सकते हैं। खासतौर पर अगर आपकी जरूरत सीमित है, जैसे केवल लाइट और पंखा, तो सोलर एक बेहद किफायती विकल्प है। इसके अन्य फायदे:
- बिजली जाने पर भी निर्बाध लाइट और पंखा चलता रहेगा।
- एक बार निवेश करने के बाद 20-25 साल तक पैनल काम करता है।
- पर्यावरण के अनुकूल और कार्बन उत्सर्जन में कमी।
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कौन-सा सिस्टम बेहतर रहेगा: ऑन-ग्रिड या ऑफ-ग्रिड?
यदि आप शहर में रहते हैं जहां बिजली की सप्लाई ठीक रहती है, तो आप ऑन-ग्रिड सिस्टम चुन सकते हैं। इससे आप बिजली कंपनी को एक्स्ट्रा यूनिट बेच सकते हैं और बिल में क्रेडिट पा सकते हैं।
लेकिन अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में हैं या जहां बिजली की कटौती होती है, तो ऑफ-ग्रिड सिस्टम ज्यादा फायदेमंद रहेगा क्योंकि इसमें बैटरी होती है जो दिन में स्टोर की गई बिजली को रात में इस्तेमाल करने की सुविधा देती है।
इंस्टॉलेशन और देखभाल
सोलर पैनल लगाने के लिए आपके पास 100-150 वर्गफुट छत की जगह होनी चाहिए। पैनल को धूप वाली दिशा में लगाया जाता है, और इसे हर कुछ हफ्तों में साफ रखना जरूरी है ताकि दक्षता बनी रहे।
इन्वर्टर और बैटरी की समय-समय पर सर्विसिंग जरूरी होती है। बैटरी की लाइफ 4-5 साल होती है, जिसे बाद में बदला जा सकता है।
सरकार से मिलने वाली सब्सिडी और योजना
भारत सरकार की PM-KUSUM योजना और राज्य सरकारों की विभिन्न स्कीमें सोलर लगाने वालों को सब्सिडी प्रदान करती हैं। आप MNRE (Ministry of New and Renewable Energy) की वेबसाइट पर जाकर पात्रता की जांच कर सकते हैं।