
Solar Stocks को लेकर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) ने एक नेगेटिव रिपोर्ट जारी की है, जिसमें इंडियन सोलर पीवी मॉड्यूल मैन्युफैक्चरर्स की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल भारत में रिन्यूएबल एनर्जी-Renewable Energy सेक्टर खासकर सोलर सेगमेंट में डिमांड की तुलना में सप्लाई कहीं ज्यादा है। यही वजह है कि आने वाले समय में शेयरों में और गिरावट देखी जा सकती है।
डिमांड से अधिक सप्लाई बना गिरावट की वजह
बर्नस्टीन के अनुसार, भारतीय सोलर पीवी मॉड्यूल इंडस्ट्री एक Cyclical Business है और मौजूदा समय में यह उस फेज़ में है जहां डिमांड की तुलना में सप्लाई काफी ज्यादा है। FY26 तक भारत में सोलर पीवी मॉड्यूल की डिमांड लगभग 40GW रहने का अनुमान है, जबकि सप्लाई पहले से ही 70GW से अधिक है। इस ओवरसप्लाई के चलते कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना है और यही निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित कर रहा है।
Waaree Energies और Premier Energies को मिली अंडरपरफॉर्म रेटिंग
बर्नस्टीन ने दो प्रमुख कंपनियों – Waaree Energies और Premier Energies – के शेयरों को लेकर अंडरपरफॉर्म की रेटिंग दी है। इन कंपनियों के शेयर पहले ही अपने उच्चतम स्तर से 37% तक टूट चुके हैं और रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है कि इनमें मौजूदा स्तर से भी 24% तक गिरावट की संभावना है।
Waaree Energies: ऊंचाई से 45% की गिरावट
1 अप्रैल को Waaree Energies का शेयर 2380 रुपए पर बंद हुआ, जबकि बर्नस्टीन ने इसका टारगेट 1902 रुपए तय किया है, जो कि वर्तमान भाव से करीब 21% कम है। अक्टूबर 2024 में कंपनी का IPO 1503 रुपए पर आया था और इसकी लिस्टिंग NSE पर 2500 रुपए पर हुई थी। नवंबर में शेयर ने 3740 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ, जिसके बाद इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली और जनवरी में शेयर 2030 रुपए के लो पर आ गया।
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Premier Energies: लिस्टिंग के बाद 35% की गिरावट
Premier Energies के शेयर पर भी बर्नस्टीन ने अंडरपरफॉर्म की रेटिंग देते हुए 693 रुपए का टारगेट दिया है, जबकि 1 अप्रैल को इसका क्लोजिंग प्राइस 910 रुपए था। यानी कि इसमें भी 24% तक की गिरावट की आशंका जताई गई है। सितंबर 2024 में इसका IPO 450 रुपए पर आया था और लिस्टिंग के समय यह 990 रुपए पर पहुंच गया था। दिसंबर में इसने 1387 रुपए का हाई बनाया, लेकिन इसके बाद से यह शेयर गिरता चला गया और अब तक इसमें 35% की गिरावट आ चुकी है।
ग्लोबल सोलर मार्केट में भी कमाई की चुनौती
बर्नस्टीन की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि ग्लोबल सोलर पीवी मार्केट में भी बड़े-बड़े खिलाड़ी अब तक तगड़ा रिटर्न नहीं कमा पाए हैं। भारतीय कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे सोलर पीवी मॉड्यूल्स की कीमत ग्लोबल स्टैंडर्ड से तीन गुना ज्यादा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि फिलहाल सरकार ने इंपोर्ट पर पाबंदियां लगाई हुई हैं, जिससे घरेलू कंपनियों को बाहरी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। हालांकि, यह स्थिति स्थायी नहीं रह सकती।
बड़ी कंपनियां ही टिक पाएंगी मैदान में
बर्नस्टीन का मानना है कि आने वाले समय में Solar Sector में वही कंपनियां टिक पाएंगी जिनके पास बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत बैकवर्ड इंटीग्रेशन होगा। उदाहरण के तौर पर, Reliance और Adani जैसी कंपनियां इस सेगमेंट में मजबूत पकड़ बना सकती हैं। इनकी स्केल और लागत नियंत्रण की क्षमता उन्हें छोटे और मझोले प्लेयर्स पर भारी बनाएगी।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
इस रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया है कि सोलर सेक्टर फिलहाल निवेशकों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। जिन कंपनियों के शेयर अपने हाई से पहले ही टूट चुके हैं, उनमें अभी और गिरावट की संभावना बनी हुई है। ऐसे में निवेश से पहले किसी फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श लेना जरूरी होगा।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी बर्नस्टीन ब्रोकरेज की रिपोर्ट पर आधारित है। यह Zee Business या किसी अन्य संस्थान की निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें।