Solar Update: वैज्ञानिकों का कमाल! अब बिना धूप के रात में भी बनेगी बिजली, इस नई ‘थर्मोरैडिएटिव’ सेल ने दुनिया को चौंकाया।

रिन्यूएबल एनर्जी की दुनिया में अब वह होने जा रहा है जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन मानी जाती थी, अब तक सोलर पैनल केवल सूरज की रोशनी में ही बिजली बनाने में सक्षम थे, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जादुई 'थर्मोरैडिएटिव सेल' (Thermoradiative Cell) विकसित कर ली है जो घने अंधेरे और रात के वक्त भी बिजली पैदा कर सकती है

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Written by Rohit Kumar

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Solar Update: वैज्ञानिकों का कमाल! अब बिना धूप के रात में भी बनेगी बिजली, इस नई 'थर्मोरैडिएटिव' सेल ने दुनिया को चौंकाया।
Solar Update: वैज्ञानिकों का कमाल! अब बिना धूप के रात में भी बनेगी बिजली, इस नई ‘थर्मोरैडिएटिव’ सेल ने दुनिया को चौंकाया।

रिन्यूएबल एनर्जी की दुनिया में अब वह होने जा रहा है जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन मानी जाती थी, अब तक सोलर पैनल केवल सूरज की रोशनी में ही बिजली बनाने में सक्षम थे, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जादुई ‘थर्मोरैडिएटिव सेल’ (Thermoradiative Cell) विकसित कर ली है जो घने अंधेरे और रात के वक्त भी बिजली पैदा कर सकती है।

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सूरज नहीं, ‘धरती की गर्मी’ से बनेगी बिजली 

आमतौर पर सोलर पैनल फोटोन सोखकर ऊर्जा बनाते हैं, लेकिन यह नई डिवाइस इसके ठीक विपरीत काम करती है। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) के शोधकर्ताओं के अनुसार, यह सेल ‘इन्फ्रारेड रेडिएशन’ के सिद्धांत पर आधारित है।

  • दिन भर सूरज की गर्मी से धरती गर्म होती है। रात के समय, पृथ्वी अपनी इस ऊष्मा (Heat) को इन्फ्रारेड किरणों के रुप में अंतरिक्ष की ओर छोड़ती है।
  •  वैज्ञानिकों की यह नई ‘थर्मोरैडिएटिव’ डिवाइस उसी बाहर निकलती हुई गर्मी को कैप्चर करती है और उसे सीधे बिजली में बदल देती है। इसी कारण इसे ‘एंटी-सोलर पैनल’ भी कहा जा रहा है।

बिजली संकट का होगा अंत?

इस तकनीक के आने से ऊर्जा क्षेत्र में तीन बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

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  1. 24/7 सप्लाई: अब बिजली उत्पादन के लिए बादलों के हटने या सूरज निकलने का इंतज़ार नहीं करना होगा, यह सिस्टम 24 घंटे काम करने में सक्षम है।
  2. बैटरी खर्च में कटौती: वर्तमान में रात की बिजली के लिए भारी-भरकम बैटरी स्टोरेज की जरूरत होती है, अगर रात में बिजली उत्पादन शुरू हो गया, तो बैटरी पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
  3. इंडस्ट्रियल वेस्ट का उपयोग: यह तकनीक सिर्फ आसमान की तरफ ही नहीं, बल्कि फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाली व्यर्थ गर्मी से भी बिजली बना सकती है। 

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कब तक पहुंचेगी आपके घर?

हालांकि यह एक ऐतिहासिक सफलता है, लेकिन अभी यह तकनीक अपने शुरुआती चरण में है, वर्तमान में यह सेल सामान्य सोलर पैनल की तुलना में बहुत कम बिजली पैदा करता है, शोधकर्ताओं का लक्ष्य अब इसकी दक्षता (Efficiency) को बढ़ाना और इसे व्यावसायिक रूप से सस्ता बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में यह तकनीक हाइब्रिड सोलर सिस्टम का हिस्सा बनेगी, जहाँ दिन में सामान्य पैनल और रात में थर्मोरैडिएटिव सेल काम करेंगे।

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Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

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