
भारत के Renewable Energy सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में शामिल Suzlon Energy Ltd एक बार फिर निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के रडार पर है। हालिया गिरावट और कुछ ऑपरेशनल चुनौतियों के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ स्टोरी अब भी बरकरार है। दिसंबर 2025 तिमाही (Q3 FY26) के नतीजों के बाद भले ही कुछ ब्रोकरेज ने अपने टारगेट प्राइस घटाए हों, लेकिन अधिकतर ने शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है।
शुक्रवार को सुजलॉन एनर्जी का शेयर 1.2% की गिरावट के साथ ₹47.28 पर बंद हुआ। इसके साथ ही कंपनी का Market Capitalization घटकर लगभग ₹65,000 करोड़ रह गया। बीते एक महीने में शेयर करीब 10% टूट चुका है, जबकि यह अपने 52-Week High ₹74.30 से लगभग 36% नीचे ट्रेड कर रहा है।
मुनाफे और रेवेन्यू में मजबूत उछाल
अगर तिमाही नतीजों पर नज़र डालें, तो सुजलॉन का प्रदर्शन आंकड़ों के लिहाज़ से मजबूत रहा है।
- Net Profit: Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा साल-दर-साल 14.8% बढ़कर ₹445.2 करोड़ पहुंच गया।
- Revenue: इसी अवधि में रेवेन्यू में 42.4% की तेजी दर्ज की गई और यह ₹4,228 करोड़ रहा।
- EBITDA: कंपनी का EBITDA 48% बढ़कर ₹730.5 करोड़ हो गया।
- EBITDA Margin: मार्जिन सुधरकर लगभग 17.3–17.4% पर पहुंच गया।
कंपनी के मुताबिक, बेहतर Order Mix, लागत नियंत्रण और 617 मेगावाट (MW) की डिलीवरी ने तिमाही नतीजों को सपोर्ट किया। इसके अलावा, तिमाही के अंत में सुजलॉन के पास ₹1,556 करोड़ की Net Cash Position रही, जो उसकी बैलेंस शीट को मजबूत बनाती है।
ग्राउंड लेवल चुनौतियाँ: Commissioning में देरी बनी चिंता
हालांकि, मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद, ग्राउंड लेवल पर कुछ गंभीर चुनौतियाँ सामने आई हैं। खासतौर पर Project Commissioning की रफ्तार उम्मीद से धीमी रही है। ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, जमीन की उपलब्धता, Right of Way (RoW) और Grid Connectivity जैसी समस्याओं के चलते प्रोजेक्ट्स के कमिशनिंग में देरी हो रही है। इसका सीधा असर रेवेन्यू रिकग्निशन और कैश फ्लो टाइमिंग पर पड़ रहा है।
JM Financial की राय: टारगेट घटा, Buy बरकरार
JM Financial ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले सात तिमाहियों में कंपनी ने कुल 3,175 MW की डिलीवरी की है, लेकिन अब तक इसमें से केवल 778 MW ही कमिशन हो पाया है। यह आंकड़ा इंडस्ट्री की चुनौतियों और ऑन-ग्राउंड एग्जीक्यूशन की दिक्कतों को दर्शाता है।
इसके बावजूद, कंपनी की Order Book 6.4 गीगावाट (GW) पर मजबूत बनी हुई है, जो भविष्य की ग्रोथ के लिए पॉजिटिव संकेत देती है। JM Financial ने FY27 और FY28 के लिए डिलीवरी अनुमान में हल्की कटौती की है, लेकिन शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए Target Price ₹70 से घटाकर ₹64 कर दिया है।
Execution कमजोर, लेकिन ग्रोथ गाइडेंस कायम
दूसरी ओर, Nuvama Institutional Equities ने भी Suzlon Energy के टारगेट प्राइस में कटौती की है। नुवामा के अनुसार, साइट और RoW से जुड़ी समस्याओं के चलते क्लाइंट ऑफटेक सीमित रहा, जिसके कारण डिलीवरी अनुमान से 15–20% कम रही। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने FY26 के लिए 60% सालाना ग्रोथ (YoY Growth) का गाइडेंस बनाए रखा है। इसके साथ ही, मैनेजमेंट को Q4 FY26 में करीब 850 MW के Execution की उम्मीद है। इन फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए, नुवामा ने शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन Target Price ₹60 से घटाकर ₹55 कर दिया है।
गिरावट में मौका या जोखिम?
कुल मिलाकर, Suzlon Energy के सामने शॉर्ट टर्म में एग्जीक्यूशन और कमिशनिंग से जुड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। लेकिन मजबूत ऑर्डर बुक, सुधरते मार्जिन, नेट कैश पोजिशन और भारत में Renewable Energy Transition की तेज़ रफ्तार को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म्स का भरोसा कंपनी की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पर कायम है। अब सवाल यही है,क्या मौजूदा स्तरों पर यह गिरावट निवेशकों के लिए Buying Opportunity साबित होगी, या आगे और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा? बाजार की नजर अब आने वाली तिमाहियों के execution और commissioning पर टिकी है।







