
फॉसिल फ्यूल के बढ़ते उपयोग और उससे जुड़े प्रदूषण के कारण पर्यावरण पर गंभीर असर हो रहा है। क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से निपटने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) की ओर रुख करना जरूरी हो गया है। इस दिशा में सोलर एनर्जी एक महत्वपूर्ण समाधान है। भारत में TATA Power Solar जैसी कंपनियां सोलर प्रोडक्ट्स और सिस्टम्स के जरिए पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
Tata 6kW सोलर सिस्टम: क्यों है यह एक बेहतर विकल्प?
TATA Power Solar, भारत की टॉप सोलर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स में से एक है, जो अपनी उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीयता के लिए जानी जाती है। टाटा का 6kW सोलर सिस्टम छोटे घरों से लेकर मध्यम आकार की कमर्शियल जरूरतों के लिए एक प्रभावी विकल्प है।
यह सिस्टम डेली लगभग 30 यूनिट पावर जनरेट करने में सक्षम है और बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे तीन प्रकारों में पेश किया गया है – ऑन-ग्रिड, ऑफ-ग्रिड और हाइब्रिड सोलर सिस्टम। सभी सिस्टम्स में 25 साल की वारंटी दी जाती है और ये बेहतरीन परफॉर्मेंस सुनिश्चित करते हैं।
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम: सस्ती और प्रभावी बिजली का समाधान
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम में सोलर पैनल द्वारा उत्पन्न बिजली को इलेक्ट्रिकल ग्रिड के साथ शेयर किया जाता है। इस सिस्टम की विशेषता है कि यह बिजली बिलों को कम करने में मदद करता है।
- लागत और सब्सिडी: टाटा 6kW ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम लगाने में लगभग ₹3 लाख का खर्च आता है। हालांकि, सरकार की सोलर रूफटॉप सब्सिडी योजना के तहत 3kW तक की क्षमता पर 40% और अगले 3kW के लिए 20% की सब्सिडी मिलती है, जिससे सिस्टम की कुल लागत कम हो जाती है।
- फायदे: नेट मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर एडिशनल इनकम भी जनरेट की जा सकती है।
ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम: बिजली कटौती वाले क्षेत्रों के लिए आदर्श
ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम उन इलाकों के लिए बेहतरीन है, जहां बिजली कटौती एक बड़ी समस्या है। इस सिस्टम में सोलर बैटरी का उपयोग किया जाता है, जिससे ग्रिड पर निर्भरता खत्म हो जाती है।
- लागत: इस सिस्टम को स्थापित करने की लागत ₹4.50 लाख तक हो सकती है।
- बैटरी विकल्प: बैकअप की जरूरत के अनुसार 100Ah, 150Ah, या 200Ah की बैटरी का चयन किया जा सकता है।
- उपयोगिता: यह सिस्टम बिजली कटौती के दौरान भी पावर सप्लाई सुनिश्चित करता है।
हाइब्रिड सोलर सिस्टम: आधुनिक तकनीक का संयोजन
हाइब्रिड सोलर सिस्टम ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड सिस्टम दोनों के फीचर्स को एक साथ पेश करता है। यह न केवल ग्रिड के साथ बिजली शेयर करता है, बल्कि सोलर बैटरी में स्टोर कर बैकअप भी प्रदान करता है।
- लागत: टाटा 6kW हाइब्रिड सोलर सिस्टम को लगाने में लगभग ₹6 लाख का खर्च आता है।
- फायदे: यह सिस्टम उन उपभोक्ताओं के लिए आदर्श है, जो एडवांस फीचर्स के साथ-साथ बैकअप की सुविधा भी चाहते हैं।
सोलर पैनल और इन्वर्टर की अहमियत
सोलर सिस्टम के परफॉर्मेंस में सोलर पैनल और इन्वर्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। टाटा के सिस्टम में मोनोक्रिस्टलाइन या पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल का उपयोग होता है, जो उच्च एफिशिएंसी के साथ लंबे समय तक बेहतर परफॉर्मेंस प्रदान करते हैं।
सोलर इन्वर्टर द्वारा सोलर पैनल से उत्पन्न DC पावर को AC पावर में कन्वर्ट किया जाता है, जिसे घर या ऑफिस की जरूरतों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
टाटा 6kW सोलर सिस्टम: लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट
TATA Power Solar अपने सिस्टम्स पर लंबी वारंटी के साथ भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करता है। यह सिस्टम न केवल बिजली के खर्च को बचाने में मदद करता है, बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ और सुरक्षित रखने में योगदान देता है।
सोलर से संबंधित प्रश्न-उत्तर
Q1. टाटा 6kW सोलर सिस्टम लगाने में कितनी लागत आती है?
ऑन-ग्रिड सिस्टम की लागत ₹3 लाख, ऑफ-ग्रिड सिस्टम की ₹4.50 लाख और हाइब्रिड सिस्टम की ₹6 लाख तक हो सकती है।
Q2. क्या सोलर पैनल पर सब्सिडी मिलती है?
हां, सरकार की रूफटॉप सोलर सब्सिडी योजना के तहत 3kW तक की क्षमता पर 40% और अगले 3kW के लिए 20% सब्सिडी उपलब्ध है।
Q3. 6kW का सोलर सिस्टम रोजाना कितनी बिजली उत्पन्न कर सकता है?
यह सिस्टम प्रतिदिन लगभग 30 यूनिट बिजली उत्पन्न करता है।
Q4. क्या टाटा 6kW सोलर सिस्टम पावर कट के दौरान काम करता है?
पावर कट के दौरान केवल ऑफ-ग्रिड और हाइब्रिड सिस्टम्स बैटरी बैकअप की मदद से काम करते हैं।
Q5. क्या सोलर सिस्टम में बैटरी अनिवार्य है?
ऑन-ग्रिड सिस्टम में बैटरी की जरूरत नहीं होती, लेकिन ऑफ-ग्रिड और हाइब्रिड सिस्टम में बैटरी का उपयोग होता है।
Q6. सोलर पैनल की वारंटी कितनी होती है?
टाटा के सोलर पैनल 25 साल की वारंटी के साथ आते हैं।
Q7. क्या अतिरिक्त बिजली बेचकर इनकम जनरेट की जा सकती है?
हां, ऑन-ग्रिड सिस्टम के जरिए अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर इनकम प्राप्त की जा सकती है।
Q8. किस प्रकार के पैनल का उपयोग करना बेहतर है?
मोनोक्रिस्टलाइन या बाइफेसियल पैनल अधिक एफिशिएंसी और बेहतर परफॉर्मेंस के लिए आदर्श हैं।