
ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे नित नए आविष्कारों के बीच अब एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक दस्तक दे रही है, जो हमारे घरों और दफ्तरों के दिखने के अंदाज को पूरी तरह बदल देगी, अब तक आपने छतों पर लगने वाले नीले या काले सोलर पैनल देखे होंगे, लेकिन अब आपकी खिड़कियों में लगा कांच ही बिजली पैदा करेगा।
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क्या है यह तकनीक?
पारदर्शी सोलर ग्लास सामान्य कांच की तरह ही पारदर्शी होता है, यह तकनीक सूर्य की दृश्य रोशनी (Visible Light) को तो अंदर आने देती है, लेकिन अल्ट्रावॉयलेट (UV) और इन्फ्रारेड (IR) किरणों को सोख लेती है, इन्हीं किरणों को यह ग्लास बिजली में परिवर्तित कर देता है। यानी अब खिड़कियां केवल रोशनी का जरिया नहीं, बल्कि ‘पावर हाउस’ बनेंगी।
कब तक आएगा बाजार में?
विशेषज्ञों और वैश्विक रुझानों के अनुसार, 2026 तक यह तकनीक व्यावसायिक रूप से बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो सकती है। वर्तमान में:
- Ubiquitous Energy और Next Energy Technologies जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी कर रही हैं।
- दुनिया की कई गगनचुंबी इमारतों में इनका ट्रायल शुरू हो चुका है।
- भारत में भी सौर ऊर्जा पर बढ़ते फोकस को देखते हुए उम्मीद है कि 2026 के अंत तक या 2027 की शुरुआत में यह प्रीमियम होम और ऑफिस सॉल्यूशंस के रूप में बाजार में दिखने लगेंगे।
इस तकनीक के बड़े फायदे
- शहरों में जहां छतों पर जगह की कमी है, वहां ऊंची इमारतों की खिड़कियां बिजली की जरूरतों को पूरा कर सकेंगी।
- यह ग्लास गर्मी पैदा करने वाली किरणों को बाहर ही रोक देता है, जिससे घर के अंदर का तापमान कम रहता है और AC का खर्च बचता है।
- घर के अंदर प्राकृतिक रोशनी बनी रहती है, जिससे दिन में बिजली की खपत कम होती है।
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चुनौतियां और कीमत
हालांकि, अभी इसकी दक्षता (Efficiency) पारंपरिक सोलर पैनलों के मुकाबले कम है, जहां सामान्य पैनल 20-22% बिजली बनाते हैं, वहीं ये ग्लास फिलहाल 5-10% तक ही सक्षम हैं, साथ ही, शुरुआत में इसकी कीमत सामान्य ग्लास से काफी अधिक रहने की उम्मीद है।
भविष्य की स्मार्ट सिटीज के लिए पारदर्शी सोलर विंडोज एक गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं, यदि आप भी अपने घर को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, तो अगले एक-दो साल इस तकनीक के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं।







