Solar To Petrol: बिजली नहीं, अब सोलर पैनल से बनेगा ‘पेट्रोल’! वैज्ञानिकों ने हवा और धूप से बनाया लिक्विड फ्यूल; जानें

ऊर्जा की दुनिया में एक ऐसी क्रांतिकारी खोज हुई है जो भविष्य में पेट्रोल-डीजल की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है, स्विट्जरलैंड के ETH Zurich के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सौर मिनी-रिफाइनरी सिस्टम विकसित किया है, जो किसी जादुई मशीन की तरह हवा और सूरज की रोशनी को सीधे लिक्विड फ्यूल (तरल ईंधन) में बदल देता है

Photo of author

Written by Rohit Kumar

Published on

Solar To Petrol: बिजली नहीं, अब सोलर पैनल से बनेगा 'पेट्रोल'! वैज्ञानिकों ने हवा और धूप से बनाया लिक्विड फ्यूल; जानें
Solar To Petrol: बिजली नहीं, अब सोलर पैनल से बनेगा ‘पेट्रोल’! वैज्ञानिकों ने हवा और धूप से बनाया लिक्विड फ्यूल; जानें

ऊर्जा की दुनिया में एक ऐसी क्रांतिकारी खोज हुई है जो भविष्य में पेट्रोल-डीजल की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है, स्विट्जरलैंड के ETH Zurich के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सौर मिनी-रिफाइनरी सिस्टम विकसित किया है, जो किसी जादुई मशीन की तरह हवा और सूरज की रोशनी को सीधे लिक्विड फ्यूल (तरल ईंधन) में बदल देता है।

यह भी देखें: Portable Solar Generator: अब साथ लेकर घूमें अपना पावर हाउस! यह छोटा सा सोलर जनरेटर चलाएगा टीवी, पंखा और लैपटॉप।

कैसे होता है यह चमत्कार?

इस तकनीक में बिजली की जरुरत नहीं पड़ती, बल्कि यह सौर तापीय ऊर्जा (Solar Thermal Energy) पर काम करती है पूरी प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों में सिमटी है:

  • हवा से कच्चा माल: सबसे पहले हवा से कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के कणों को निकाला जाता है।
  • सौर रिएक्टर का पावर: एक विशाल दर्पण धूप को केंद्रित कर रिएक्टर में 1,500 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी पैदा करता है, इस तापमान पर CO2 और पानी टूटकर ‘सिनगैस’ (Syngas) में बदल जाते हैं।
  • ईंधन का निर्माण: अंत में इस गैस को लिक्विड फॉर्म में प्रोसेस किया जाता है, जिससे पेट्रोल, केरोसिन या मेथनॉल प्राप्त होता है। 

यह भी देखें: Solar for AC: क्या 3kW के सोलर सिस्टम पर चल सकता है 1.5 टन का AC? जानें सही इन्वर्टर साइज और लोड की पूरी कैलकुलेशन।

Also ReadSuzlon Energy Share: ₹70 पार कर सकता है ये दमदार एनर्जी शेयर! जानिए क्यों रिटेल निवेशक लगा रहे हैं पैसा बारिश की तरह

Suzlon Energy Share: ₹70 पार कर सकता है ये दमदार एनर्जी शेयर! जानिए क्यों रिटेल निवेशक लगा रहे हैं पैसा बारिश की तरह

पर्यावरण के लिए ‘वरदान’

इस ईंधन की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘कार्बन न्यूट्रल’ होना है, वैज्ञानिकों का दावा है कि यह ईंधन जलते समय उतना ही कार्बन छोड़ता है जितना इसे बनाने के दौरान हवा से सोखा गया था, इससे ग्लोबल वार्मिंग पर लगाम लगेगी।

हवाई जहाजों के लिए गेमचेंजर

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक विशेष रूप से विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) के लिए मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि विमानों के लिए बैटरी का उपयोग करना फिलहाल कठिन है, ETH Zurich की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, अब इस तकनीक को Synhelion जैसी कंपनियों के जरिए औद्योगिक स्तर पर उतारने की तैयारी चल रही है।

Also ReadSolar Panel Cleaning Guide: सोलर पैनल की सफाई कब, कैसे और क्यों करनी है जरूरी? सही तरीका अपनाया तो बिजली बिल होगा आधा

Solar Panel Cleaning Guide: सोलर पैनल की सफाई कब, कैसे और क्यों करनी है जरूरी? सही तरीका अपनाया तो बिजली बिल होगा आधा

Author
Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

Leave a Comment

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें