
देशभर में Renewable Energy के प्रति बढ़ते रुझान और सरकार की सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के बीच अब आम लोग भी अपने घर और व्यापारिक परिसरों पर सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। खासकर 1 से 10 किलोवाट (kW) के बीच की Solar Installation की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन सोलर पैनल जितना जरूरी है, उतनी ही अहम है सही बैटरी का चयन, जो उत्पन्न हुई ऊर्जा को स्टोर कर सके और ज़रूरत पड़ने पर निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति कर सके। इस लेख में हम बताएंगे कि 1 से 10 kW के सोलर सिस्टम के लिए उपयुक्त बैटरी कैसे चुनें और किन बातों का ध्यान रखें।
दैनिक ऊर्जा खपत का आंकलन है सबसे पहला कदम
Battery Selection से पहले आपको यह समझना होगा कि आपकी दैनिक बिजली खपत कितनी है। इसे किलोवाट-घंटे (kWh) में मापा जाता है और आपके बिजली बिल से आसानी से पता चल सकता है। मान लीजिए आपकी औसत दैनिक खपत 30 kWh है, तो बैटरी ऐसी होनी चाहिए जो कम से कम इतनी ऊर्जा स्टोर कर सके ताकि बिजली न होने की स्थिति में सपोर्ट मिल सके।
बैटरी का प्रकार और क्षमता आपकी जरूरत से तय होगी
जब आप बैटरी का चुनाव करते हैं, तो दो प्रमुख प्रकार सामने आते हैं – लिथियम-आयन (Lithium-ion) और लीड-एसिड (Lead Acid) ।
Lithium-ion बैटरियां आजकल सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं क्योंकि ये ज्यादा ऊर्जा स्टोर कर सकती हैं, इनकी दक्षता (Efficiency) बेहतर होती है और जीवनकाल भी लंबा होता है। हालांकि, इनकी कीमत Lead Acid बैटरियों की तुलना में अधिक होती है।
वहीं, Lead Acid बैटरियां सस्ती होती हैं लेकिन इनकी लाइफ और डिस्चार्ज क्षमता सीमित होती है।
डिस्चार्ज की गहराई (DoD) से तय होती है बैटरी की उपयोगिता
Depth of Discharge (DoD) वह पैरामीटर है जो बताता है कि बैटरी की कुल क्षमता में से आप कितनी ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी बैटरी की क्षमता 10 kWh है और उसका DoD 80% है, तो आप उसमें से 8 kWh उपयोग कर सकते हैं।
Lithium-ion बैटरियों में यह आंकड़ा आमतौर पर 80-90% होता है, जबकि Lead Acid बैटरियों में यह लगभग 50-60% तक ही सीमित रहता है। इसलिए, बैटरी खरीदते समय इसकी DoD जरूर जांचें।
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सौर पैनल की क्षमता के अनुसार बैटरी का आकार तय करें
आपके सोलर पैनल प्रतिदिन कितनी बिजली उत्पन्न करते हैं, इसका सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि बैटरी कितनी तेजी और कितनी मात्रा में चार्ज होगी। उदाहरण के तौर पर, एक 5 kW का सोलर सिस्टम प्रतिदिन औसतन 20 kWh बिजली उत्पन्न करता है। ऐसे में अगर आपकी बैटरी की क्षमता 10 kWh है, तो वह आसानी से एक दिन में पूरी तरह चार्ज हो सकती है।
बैकअप अवधि की गणना करें – रात या बरसात के लिए तैयार रहें
अगर आप चाहते हैं कि आपकी बैटरी रातभर या खराब मौसम (जैसे बरसात या घने बादलों वाले दिन) में भी बिजली की निर्बाध आपूर्ति करती रहे, तो आपको ऐसी बैटरी की जरूरत होगी जिसकी क्षमता आपकी Backup जरूरतों के मुताबिक हो। मान लीजिए आपको रात में 15 kWh की जरूरत होती है, तो बैटरी की क्षमता इतनी होनी चाहिए कि वह यह आपूर्ति कर सके।
भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखें
अगर आप आने वाले समय में अपने सोलर सिस्टम को अपग्रेड करने की योजना बना रहे हैं या घर में नए बिजली उपकरण जोड़ने का विचार है, तो Modular Battery System का चयन करें। इससे आप जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बैटरियां जोड़ सकते हैं और अपनी स्टोरेज क्षमता बढ़ा सकते हैं।
स्थानीय जलवायु की भूमिका भी अहम
उत्तर प्रदेश के आगरा जैसे क्षेत्रों में सालभर अच्छी धूप मिलती है, लेकिन मानसून में सौर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे समय में बैटरी से ही ऊर्जा की आपूर्ति होती है। इसलिए मानसून को ध्यान में रखकर बैटरी की क्षमता थोड़ी अधिक रखें ताकि बिजली कटौती की स्थिति में परेशानी न हो।
बजट और लागत पर संतुलन बनाना जरूरी
Battery सिस्टम की कीमत सोलर सिस्टम की कुल लागत का बड़ा हिस्सा होती है। Lithium-ion बैटरियों की कीमत ज्यादा होती है लेकिन वे लंबे समय तक चलती हैं और मेंटेनेंस की जरूरत भी कम होती है। वहीं Lead Acid बैटरियां सस्ती होती हैं लेकिन इन्हें बार-बार रिप्लेस करना पड़ता है और इनका मेंटेनेंस खर्च भी अधिक होता है। इसलिए एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में सोचकर सही बैलेंस बनाएं।
प्रोफेशनल सलाह से मिलेगा कस्टम समाधान
हर घर या व्यापारिक स्थल की जरूरत अलग होती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप किसी अनुभवी सोलर इंस्टॉलर या Renewable Energy विशेषज्ञ से संपर्क करें। वे आपके स्थान, खपत और बजट के हिसाब से आपको सबसे बेहतर बैटरी समाधान दे सकते हैं।