
फीडर सोलराइजेशन योजना के तहत किसानों और निवेशकों के लिए राहत की खबर है। प्रधानमंत्री कुसुम-C योजना (PM Kusum-C Scheme) के अंतर्गत फीडर-स्तरीय सोलराइजेशन (Feeder Solarization) के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को 2 अप्रैल 2025 से बढ़ाकर अब 23 अप्रैल 2025 कर दिया गया है। यह निर्णय बिहार सरकार और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा किसानों को अधिक अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है ताकि वे इस योजना से लाभ उठा सकें और रिन्यूएबल एनर्जी-Renewable Energy क्षेत्र में भागीदारी निभा सकें।
किसानों को मिलेगी स्थायी और किफायती बिजली, बढ़ेगा आय का स्रोत
इस योजना के तहत बिहार के 962 विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े कुल 3188 कृषि/मिश्रित फीडरों का सोलराइजेशन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य है कि राज्य के किसानों को स्थायी, विश्वसनीय और किफायती बिजली आपूर्ति मिल सके, जिससे उनकी सिंचाई और खेती पर आने वाला खर्च घटे।
फीडर सोलराइजेशन योजना के अंतर्गत किसान दो विकल्पों के साथ आगे बढ़ सकते हैं—
पहला, वे अपनी खुद की भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plant) स्थापित कर सकते हैं। दूसरा, वे अपनी भूमि को लीज या रेंट पर देकर सोलर पावर डेवलपर्स को उपलब्ध करा सकते हैं। इससे किसानों को एक निश्चित और स्थायी आय का स्रोत प्राप्त होगा।
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31 मार्च 2026 तक कमीशन वाले प्लांट्स को मिलेगी 100% वित्तीय सहायता
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो भी सौर ऊर्जा संयंत्र 31 मार्च 2026 तक कमीशन कर दिए जाएंगे, उन्हें पूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस सहायता में केंद्र सरकार की ओर से 1.05 करोड़ रुपये तक का योगदान और राज्य सरकार की ओर से 45 लाख रुपये तक का अनुदान शामिल है।
इससे किसानों को सौर ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करने के लिए न केवल प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि उन्हें किसी प्रकार की वित्तीय बाधा का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।
निवेशकों और डेवलपर्स के लिए भी सुनहरा अवसर
यह योजना न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि सोलर डेवलपर्स और निजी निवेशकों के लिए भी एक सुनहरा अवसर बनकर सामने आई है। उन्हें सस्ती दरों पर भूमि उपलब्ध होगी और उन्हें गारंटीड पावर पर्चेज एग्रीमेंट (PPA) का लाभ मिलेगा। इससे बिहार में Renewable Energy Investment को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में वृद्धि होगी।
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योजना का क्रियान्वयन और पर्यावरणीय लाभ
केंद्र सरकार की PM Kusum-C योजना के तीसरे घटक के रूप में लागू हो रही यह योजना, न केवल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। डीजल जनरेटर या कोयले से चलने वाले संयंत्रों की तुलना में सौर ऊर्जा संयंत्र प्रदूषण मुक्त हैं और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाते हैं।
इस योजना से बिहार में ग्रीन एनर्जी ग्रीड का निर्माण होगा और 2030 तक भारत के नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
अब भी है समय—जल्दी करें आवेदन
जिन किसानों या निवेशकों ने अब तक इस योजना के लिए आवेदन नहीं किया है, उनके लिए अब भी समय है। 23 अप्रैल 2025 तक आवेदन करके वे इस सरकारी योजना का लाभ उठा सकते हैं। बिहार में इच्छुक आवेदक BREDA (Bihar Renewable Energy Development Agency) की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विद्युत वितरण कंपनी के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
योजना से जुड़ी अन्य जानकारी और दिशा-निर्देश वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और ऑनलाइन है, जिससे कोई भी किसान या डेवलपर घर बैठे आवेदन कर सकता है।