EV बैटरी में आत्मनिर्भरता की ओर भारत: कौन-कौन से स्टेप्स लिए जा रहे हैं?

सरकार की PLI योजना, टाटा का $1.5 Billion निवेश और बैटरी रीसाइक्लिंग से भारत EV बैटरी निर्माण में कर रहा है क्रांति—जानिए कैसे बन रहा है देश आत्मनिर्भर और ग्लोबल लीडर!

Photo of author

Written by Rohit Kumar

Published on

EV बैटरी में आत्मनिर्भरता की ओर भारत: कौन-कौन से स्टेप्स लिए जा रहे हैं?
EV बैटरी में आत्मनिर्भरता की ओर भारत: कौन-कौन से स्टेप्स लिए जा रहे हैं?

भारत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए बहुपक्षीय रणनीतियों पर काम कर रहा है। सरकार और निजी कंपनियों के बीच बढ़ते सहयोग, नीति समर्थन और निवेश के चलते देश EV बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) की ओर संक्रमण को भी गति देता है।

PLI योजना से बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहा बड़ा प्रोत्साहन

भारत सरकार ने उन्नत रसायन कोशिकाओं (Advanced Chemistry Cells) के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ₹18,100 करोड़ की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य भारत को बैटरी निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाना है। इस योजना के तहत रिलायंस न्यू एनर्जी बैटरी लिमिटेड को 10 गीगावॉट-घंटे (GWh) की उत्पादन क्षमता स्थापित करने का अनुबंध दिया गया है। इससे देश की स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) रणनीति और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को बड़ा बल मिलेगा।

EV बैटरियों पर आयात शुल्क में छूट से घरेलू निर्माण को बढ़ावा

EV बैटरियों और मोबाइल निर्माण में आवश्यक 35 प्रमुख वस्तुओं पर आयात शुल्क को समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले का सीधा असर घरेलू विनिर्माण (Local Manufacturing) और निर्यात प्रतिस्पर्धा (Export Competitiveness) पर पड़ा है। सरकार के इस कदम से भारत में EV बैटरी इंडस्ट्री को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस आधार मिला है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय निर्माता वैश्विक बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।

टाटा जैसे बड़े उद्योग समूहों का निवेश EV बैटरी सेक्टर में तेजी ला रहा है

स्थानीय स्तर पर EV बैटरियों के निर्माण में टाटा मोटर्स जैसी प्रमुख कंपनियां निवेश कर रही हैं। टाटा समूह भारत में अपनी पहली बैटरी गीगाफैक्टरी (Gigafactory) स्थापित करने के लिए $1.5 बिलियन का निवेश कर रहा है। यह फैक्टरी 2026 तक चालू होने की उम्मीद है, जो EV बैटरियों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुदृढ़ करेगी। इससे भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को स्थायी और भरोसेमंद समर्थन मिलेगा।

यह भी पढ़े-TDSG JV फैक्ट्री: कैसे Suzuki बना रहा है भारत में अपनी बैटरी सप्लाई चेन

Also ReadACME Solar और NHPC के बीच बड़ा समझौता, आंध्र प्रदेश में 275 MW बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट का ऐलान

ACME Solar और NHPC के बीच बड़ा समझौता, आंध्र प्रदेश में 275 MW बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट का ऐलान

लिथियम-आयन बैटरियों की रीसाइक्लिंग से संसाधनों में आत्मनिर्भरता

लिथियम-आयन बैटरियों (Lithium-Ion Batteries) के रीसाइक्लिंग पर भारत सरकार और उद्योग जगत का विशेष जोर है। मौजूदा बैटरियों से लिथियम और अन्य महत्त्वपूर्ण तत्वों की पुनर्प्राप्ति न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि इससे बैटरी सेल निर्माण में आत्मनिर्भरता भी बढ़ती है। यह पहल भारत को कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी और सर्कुलर इकॉनमी (Circular Economy) की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

‘मेक इन इंडिया’ नीति से बैटरी उत्पादन को दी जा रही मजबूती

‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल के तहत सरकार EV बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन और सब्सिडी मुहैया करा रही है। नीति आयोग, भारी उद्योग मंत्रालय और अन्य विभागों की सक्रिय भूमिका से भारत में EV बैटरियों का निर्माण अब गति पकड़ रहा है। यह न केवल आयात पर निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि देश को टेक्नोलॉजी इनोवेशन में भी अग्रणी बना रहा है।

भविष्य की दिशा: आत्मनिर्भर भारत के लिए बैटरी क्षेत्र में क्रांति

इन पहलों के माध्यम से भारत EV बैटरी निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। PLI स्कीम, निवेश, नीति समर्थन, और रिसाइक्लिंग जैसे उपायों ने देश में EV इकोसिस्टम को सशक्त किया है। आने वाले वर्षों में जब भारत में EV की मांग बढ़ेगी, तब एक मजबूत बैटरी मैन्युफैक्चरिंग आधार देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा और ग्रीन मोबिलिटी (Green Mobility) के सपने को साकार करेगा।

Also ReadOld Laptop Batteries into Power Banks

E-Waste to Energy: Turning Old Laptop Batteries into Power Banks; A Massive Business Idea.

Author
Rohit Kumar
रोहित कुमार सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों का गहन अनुभव है। उन्होंने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सौर ऊर्जा की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, और सौर ऊर्जा नवीनतम तकनीकी रुझानों पर शोधपूर्ण और सरल लेखन किया है। उनका उद्देश्य सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पाठकों को ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराना है। अपने लेखन कौशल और समर्पण के कारण, वे सोलर एनर्जी से जुड़े विषयों पर एक विश्वसनीय लेखक हैं।

Leave a Comment

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें