
भारत में Lithium Refinery की बढ़ती जरूरत को देखते हुए मणिकरण पावर लिमिटेड और ऑस्ट्रेलिया की कंपनी Neometals Limited ने मिलकर देश की पहली लिथियम रिफाइनरी स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। यह पहल भारत को लिथियम जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस रिफाइनरी का निर्माण गुजरात में किया जाएगा और इसकी अनुमानित लागत करीब ₹2,200 करोड़ बताई जा रही है।
इस रिफाइनरी की स्थापना से भारत के EV सेक्टर यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण को नई ऊर्जा मिलेगी, साथ ही देश की रिन्यूएबल एनर्जी-Renewable Energy आधारित परियोजनाओं को भी मजबूती मिलेगी। मणिकरण पावर और Neometals के इस जॉइंट वेंचर को लेकर उद्योग जगत में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
गुजरात में ₹2,200 करोड़ की लागत से बनेगी Lithium Refinery
गुजरात में बनने वाली इस लिथियम रिफाइनरी की लागत लगभग ₹2,200 करोड़ होगी। यह रिफाइनरी सालाना 20,000 टन बैटरी-ग्रेड लिथियम हाइड्रॉक्साइड का उत्पादन करेगी। यह वही कंपाउंड है जो लिथियम-आयन बैटरियों के निर्माण में मुख्य कच्चा माल होता है। जैसे-जैसे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इस तरह की रिफाइनरियों की जरूरत भी सामने आ रही है।
इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 1,000 नौकरियों का सृजन भी होगा, जो गुजरात के औद्योगिक विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
दुनिया भर से होगा स्पोड्यूमीन कंसंट्रेट का आयात
रिफाइनरी के लिए आवश्यक कच्चा माल—स्पोड्यूमीन कंसंट्रेट (Spodumene Concentrate)—मुख्य रूप से विदेशों से आयात किया जाएगा। हालांकि, रिफाइनिंग की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले रिएजेंट्स भारत में ही उपलब्ध होंगे, जिससे देश के रासायनिक उद्योग को भी लाभ पहुंचेगा। यह संयोजन भारत की इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन को मज़बूत करने वाला साबित हो सकता है।
Neometals कंपनी के पास पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की माउंट मैरियन खदान से स्पोड्यूमीन कंसंट्रेट के अधिग्रहण का अधिकार है। यही कच्चा माल इस गुजरात स्थित रिफाइनरी में उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और निरंतरता बनी रहेगी।
यह भी पढ़े-EV बैटरी में आत्मनिर्भरता की ओर भारत: कौन-कौन से स्टेप्स लिए जा रहे हैं?
Lithium Refinery से आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को बल
भारत में लिथियम का भंडार सीमित है, और EV मैन्युफैक्चरिंग से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज तक लिथियम की भारी मांग है। ऐसे में यह रिफाइनरी भारत को लिथियम-आधारित बैटरियों के लिए जरूरी कच्चे माल में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।
यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी प्रोत्साहित करती है और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के मोर्चे पर भारत की स्थिति को और मज़बूत करेगी।
लिथियम की घरेलू रिफाइनिंग से आयात पर निर्भरता घटेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। साथ ही भारत में बनने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत भी नियंत्रित रहेगी।
EV क्रांति में भारत को मिलेगा नया बूस्ट
इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में भारत की तेजी से बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह रिफाइनरी एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। जैसे-जैसे सरकार EV पॉलिसी को लेकर प्रोत्साहन बढ़ा रही है, बैटरी निर्माण की जरूरत और भी ज़्यादा हो गई है।
इस रिफाइनरी के शुरू होने से भारतीय बाजार में EV बैटरियों की उपलब्धता बढ़ेगी और देश के स्टार्टअप्स और ऑटो कंपनियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार संसाधन मिल सकेंगे।
इसके अलावा, यह पहल न केवल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देगी बल्कि भारत को Global EV Ecosystem में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी भी बना सकती है।