India Solar Manufacturing: सिर्फ 5 साल में चीन को पछाड़ देगा भारत? Solar Manufacturing में होगा बड़ा उलटफेर

जानिए कैसे भारत की सौर ऊर्जा विनिर्माण क्षमता दुनिया को चौंकाने वाली तेजी से बढ़ रही है, और यह कैसे नए वैश्विक बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। पढ़िए भारत की सोलर क्रांति की पूरी कहानी!

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भारत सोलर ऊर्जा क्षेत्र में इस दशक के अंत तक एक नई क्रांति लाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। 2025 से 2029 के बीच, भारत में लगभग 213 गीगावॉट (GW) की नई सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित होने का अनुमान है, साथ ही मॉड्यूल निर्माण की क्षमता 280 GW से अधिक होगी। इसके साथ ही, सौर सेल निर्माण की क्षमता भी तेजी से बढ़कर 26 GW से करीब 171 GW तक पहुंच जाएगी। यह विकास भारत को वैश्विक सौर ऊर्जा निर्माण के प्रमुख केंद्रों में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

India Solar Manufacturing: सिर्फ 5 साल में चीन को पछाड़ देगा भारत? Solar Manufacturing में होगा बड़ा उलटफेर

भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र: विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

भारत का सौर ऊर्जा उद्योग अब परिपक्वता के नए दौर में प्रवेश कर रहा है जहां सरकार की पहल से हटकर प्रतिस्पर्धा, उच्च तकनीक और स्थिरता पर फोकस बढ़ा है। इस तेजी से विस्तार के कारण, भारत के लिए निर्यात के अवसर भी बढ़ रहे हैं। अगर देश अपनी मॉड्यूल निर्माण क्षमता का केवल 65% उपयोग करता है तो 2030 तक लगभग 143 GW सौर मॉड्यूल का निर्यात संभव होगा। यह निर्यात बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में सहायक होगा।

भारतीय और चीनी सौर मॉड्यूल कीमतों की तुलना

बीते वर्षो भारत ने लागत संरचना में सुधार किया है। टनल ऑक्साइड पैसिवर्सटेड कॉन्टैक्ट (TOPCon) तकनीक के मॉड्यूल की कीमतों में भारत और चीन के बीच का अंतर $9 प्रति वाट से घटकर $5.7 प्रति वाट रह गया है। हालांकि, भारत की न्यूनतम टिकाऊ कीमतें चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की तुलना में 14-17% अधिक बनी हुई हैं, जिससे पता चलता है कि तकनीकी और उत्पादन दक्षता में और सुधार की जरूरत है।

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निर्यात के लिए अनुकूल आर्थिक और पर्यावरणीय कारक

भारत के यूरोप जैसे स्थिरता पर विशेष ध्यान देने वाले बाजारों में मजबूत पकड़ बनाने के लिए कई लाभ हैं। भारत से यूरोप तक माल ढुलाई की लागत मॉड्यूल की कीमत का लगभग 5% है, जो कि चीन की लागत 8.7% से कम है, साथ ही यह मार्ग पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी बेहतर है क्योंकि चीन के मुकाबले इसमें कार्बन उत्सर्जन करीब 65% कम होता है। प्रस्तावित यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौता इस क्षेत्र में सहयोग और निर्यात को और प्रोत्साहित करेगा।

सरकार की पहल और भविष्य के लक्ष्य

भारत सरकार भी अपने प्रयासों से इस क्षेत्र को लगातार विकसित कर रही है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) जैसी योजनाएं सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। इसके अलावा, घरेलू छतों पर सौर पैनल लगाने के प्रयास सफल हो रहे हैं। भारत के जलवायु लक्ष्यों के तहत, 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में तेजी लाने का लक्ष्य भी सौर ऊर्जा क्षेत्र के तेजी से विकास में सहायक है।

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