
महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) ने Renewable Energy सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) द्वारा सौर ऊर्जा उत्पादकों पर लगाए गए वीलिंग चार्ज को अनुचित करार दिया है। यह निर्णय न केवल सौर ऊर्जा उत्पादकों के लिए राहत का कारण बना है, बल्कि इससे राज्य में Renewable Energy में निवेश की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।
MSEDCL ने मई 2023 से मार्च 2024 के बीच TP सोलापुर सौऱ्य, TP आर्य सौऱ्य, और TP एकादश नामक तीन सौर ऊर्जा कंपनियों से वीलिंग चार्ज के तौर पर लगभग ₹1.54 करोड़ वसूले थे। MERC ने स्पष्ट किया है कि ये चार्ज असंगत थे और MSEDCL को इसे ब्याज सहित वापस लौटाना होगा। इसके अलावा, इन कंपनियों से काटे गए 2.10 मिलियन यूनिट ऊर्जा को भी उनके खातों में पुनः जोड़ा जाएगा।
वीलिंग चार्ज विवाद की जड़ में क्या था
इस पूरे विवाद का केंद्र बिंदु था कि इन सौर ऊर्जा कंपनियों ने अपनी उत्पन्न बिजली को सीधे महाराष्ट्र राज्य विद्युत ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (MSETCL) के 132 kV ट्रांसमिशन नेटवर्क में भेजा, न कि MSEDCL के वितरण नेटवर्क के माध्यम से। जब वितरण नेटवर्क का उपयोग ही नहीं हुआ, तो फिर वीलिंग चार्ज और वीलिंग लॉस की मांग ही अप्रासंगिक हो जाती है।
MERC ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि यदि कोई सौर उत्पादक Distribution नेटवर्क का उपयोग नहीं कर रहा है, तो MSEDCL को वीलिंग चार्ज या लॉस की वसूली का कोई अधिकार नहीं है। यह निर्णय कानूनी, तकनीकी और नीतिगत दृष्टिकोण से Renewable Energy सेक्टर के लिए एक नई दिशा तय करता है।
Renewable Energy निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत
MERC का यह निर्णय सौर ऊर्जा निवेशकों और उत्पादकों के लिए एक बड़ा आश्वासन है। यह न केवल उन्हें अनावश्यक शुल्कों से राहत देता है, बल्कि Renewable Energy को अपनाने के लिए अनुकूल वातावरण भी बनाता है। नीति निर्धारकों को यह दिखाने में भी यह आदेश सहायक होगा कि जब नियामक संस्थाएं पारदर्शिता और न्याय का पालन करती हैं, तो हरित ऊर्जा की ओर कदम और सशक्त हो जाते हैं।
इस निर्णय से अन्य राज्यों के नियामक आयोगों को भी दिशा मिल सकती है कि वे ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें सौर उत्पादकों को Distribution कंपनियों की मनमानी से बचाया जा सके।