
आज के दौर में Renewable Energy खासकर रूफटॉप सोलर सिस्टम का चलन तेजी से बढ़ा है। यह न सिर्फ बिजली के बिल को कम करने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी निभाने का एक सशक्त तरीका भी है। लेकिन बहुत से लोग जल्दबाज़ी में या अधूरी जानकारी के साथ सोलर सिस्टम इंस्टॉल करवा लेते हैं, जिससे बाद में उन्हें आर्थिक नुकसान और तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल करने से पहले कुछ बुनियादी तथ्यों को समझना जरूरी है। यह आर्टिकल उन्हीं अहम बिंदुओं को विस्तार से बताता है जिनका ध्यान रखकर आप एक समझदार और लाभदायक निवेश कर सकते हैं।
सोलर पैनल के प्रकार और उनका चुनाव कैसे करें
सबसे पहले बात आती है सोलर पैनल के प्रकार की। मुख्यतः दो प्रकार के सोलर पैनल होते हैं— मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन। मोनोक्रिस्टलाइन पैनल अधिक एफिशिएंट होते हैं और कम जगह में ज्यादा बिजली उत्पन्न करते हैं। वहीं पॉलीक्रिस्टलाइन थोड़ा सस्ता विकल्प है लेकिन उनकी एफिशिएंसी कम होती है। यदि आपके पास सीमित छत की जगह है और आप ज्यादा उत्पादन चाहते हैं, तो मोनोक्रिस्टलाइन बेहतर विकल्प हो सकता है।
सोलर सेल की गुणवत्ता से समझौता न करें
हर पैनल में कई सोलर सेल लगे होते हैं। यदि इनकी गुणवत्ता घटिया होगी तो पूरा पैनल जल्द खराब हो सकता है। हमेशा Tier-1 ब्रांड्स के पैनल लें और यह सुनिश्चित करें कि वे BIS प्रमाणित हों। गुणवत्ता ही लंबी उम्र और बेहतर परफॉर्मेंस की गारंटी देती है।
वारंटी और AMC को अच्छी तरह समझें
अच्छे सोलर पैनल कम-से-कम 25 साल की परफॉर्मेंस वारंटी के साथ आते हैं। इन्वर्टर और बैटरी, खासकर यदि आपने हाइब्रिड या ऑफ-ग्रिड सिस्टम चुना है, पर 5-10 साल की वारंटी मिलती है। साथ ही कई कंपनियाँ AMC (Annual Maintenance Contract) देती हैं, जो सालाना सिस्टम की देखभाल करती हैं और उसकी लाइफ को बढ़ाती हैं।
सही इंस्टॉलर और कंपनी का चयन करें
सोलर सिस्टम इंस्टॉल करना एक तकनीकी काम है। किसी लोकल डीलर या अनजान कंपनी से केवल कीमत के आधार पर सिस्टम लगवाना भारी गलती हो सकती है। MNRE द्वारा मान्यता प्राप्त चैनल पार्टनर से ही सिस्टम लगवाएं। उनके पूर्व ग्राहक समीक्षा, इंस्टॉलेशन रिकॉर्ड और कस्टमर सपोर्ट पर भी नजर डालें।
स्ट्रक्चर और मॉड्यूल की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है
सोलर पैनल खुले में रहते हैं, जहाँ बारिश, हवा, धूल और धूप का असर पड़ता है। ऐसे में पैनल की फ्रेमिंग मजबूत एल्युमिनियम से बनी होनी चाहिए और शीशा टेम्पर्ड ग्लास का हो। इससे पैनल लंबे समय तक खराब नहीं होंगे।
छत की स्थिति और धूप की दिशा का सही आंकलन करें
ध्यान रखें कि आपके पैनल को रोज़ाना कम-से-कम 5–6 घंटे सीधी धूप मिले। पेड़, पानी की टंकी या आसपास की छाया धूप को रोक सकती है। दक्षिण दिशा (South-facing) पैनल इंस्टॉल करने के लिए आदर्श मानी जाती है।
सरकारी सब्सिडी और योजनाओं का लाभ उठाएं
भारत सरकार और कई राज्य सरकारें रूफटॉप सोलर सिस्टम पर 30–40% तक की सब्सिडी प्रदान करती हैं। इसके लिए आपको DISCOM या MNRE (Ministry of New and Renewable Energy) की वेबसाइट पर आवेदन करना होता है। National Portal for Rooftop Solar पर रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है ताकि आप सब्सिडी का लाभ ले सकें।
स्थानीय नियम और NOC की जानकारी पहले लें
कुछ क्षेत्रों में नगर निगम या हाउसिंग सोसाइटी की अनुमति जरूरी होती है। यदि आप ग्रिड से कनेक्टेड सिस्टम लगवा रहे हैं तो DISCOM से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना अनिवार्य हो सकता है। पहले से सभी ज़रूरी अनुमति ले लेने से बाद में रुकावटें नहीं आतीं।
पूरी वित्तीय योजना तैयार करें
रूफटॉप सोलर एक बड़ा निवेश है, जिसकी लागत आमतौर पर प्रति किलोवॉट ₹60,000 से ₹75,000 तक हो सकती है (बिना सब्सिडी)। लेकिन यह निवेश 5-6 साल में रिकवर हो जाता है और उसके बाद 15-20 साल तक मुफ्त बिजली देता है। इसलिए ROI (Return on Investment) की पूरी गणना करें और अपनी बचत की योजना बनाएं।
विशेषज्ञ से सलाह और साइट सर्वे जरूर करवाएं
बिना साइट सर्वे और विशेषज्ञ सलाह के सोलर सिस्टम न लगवाएं। एक योग्य इंजीनियर आपके छत की स्थिति, बिजली की खपत और सिस्टम की आवश्यकता का सटीक आंकलन कर सकता है, जिससे आपका सिस्टम ज्यादा एफिशिएंट और टिकाऊ बनेगा।